सभी जिला अधिकारियों को हर दिन जनता से मुलाकात के लिए दो घंटे का समय तय करना होगा। उन्हें जनसमस्याओं के समाधान के लिए विधायकों के साथ नियमित बैठकें भी करनी होंगी। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने शनिवार को इस संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी जनसमस्याओं के समाधान के लिए विधायकों के साथ नियमित बैठकों व जनता से मुलाकात की रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराएंगे।
मुख्यमंत्री के इन आदेशों को नौकरशाही पर लगाम कसने के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, सत्ता पक्ष के ही विधायक नौकरशाही पर मनमानी का आरोप लगाते आए हैं। हाल ही में महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्या ने कहा था कि चार साल उन्हें नौकरशाही ने काम नहीं करने दिया।
पिछले चार साल के दौरान कुछ जिलों में भाजपा विधायक और जिलाधिकारी आमने-सामने नजर आए। त्रिवेंद्र सरकार में मुख्य सचिव को यह आदेश जारी करना पड़ा कि नौकरशाही जनप्रतिनिधियों के प्रति आदर से पेश आएं। अब मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जनप्रतिनिधियों से समन्वय सुनिश्चित करें। नियमित रूप से अपने जिले के विधायकों से बैठक कर यथासंभव जनसमस्याओं का समाधान करेंगे।
कैंप कार्यालय में नहीं मुख्य कार्यालय में बैठें
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलाधिकारी अपने कैंप कार्यालय में न बैठकर अपने मूल कार्यालय में बैठें, ताकि आगंतुक आम जनता को कष्ट न हो। आम जनता की जिलाधिकारी तक आसानी से पहुंच सुनिश्चित हो।
जनसमस्याओं के लिए निकालें दो घंटे
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक दिन दो घंटे जिलाधिकारी जनता से मिलकर उनकी समस्या सुनेंगे और तुरंत समाधान करेंगे। जनप्रतिनिधियों को पूरा सम्मान हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाए।