सीएम बनने के बाद पहली बार पिथौरागढ़ पहुंचे मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने बेस चिकित्सालय में 26.92 लाख से बन रहे ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट (ओजीपी) का शिलान्यास किया। उन्होंने 4.52 करोड़ रुपये की लागत के कुल तीन कार्यों का शिलान्यास किया। उन्होंने पिथौरागढ़ में 7.7 करोड़ रुपये लागत की आठ योजनाओं का लोकार्पण भी किया। सीएम ने कहा कि कोविड काल में डॉक्टर, नर्स, एएनएम कोरोना संक्रमितों को नया जीवन देने का काम कर रहे हैं। उन्होंने सांसद अजय टम्टा के साथ पीपीई किट पहनकर बेस और जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती संक्रमित मरीजों से व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली।
सीएम ले रहे थे अस्पताल का जायजा, हलक में फंसी थी महिला की जान
सीएम के दौरे के दौरान अव्यवस्थाएं भी देखने को मिलीं। मुख्यमंत्री जिस समय जिला अस्पताल स्थित कोविड वार्ड का निरीक्षण कर रहे थे, उस समय अस्पताल रोड सरकारी अमले और नेताओं के वाहनों से पटा था। जाम के चलते काफलीगैर से गंभीर मरीज बसंती देवी (75) को लेकर आ रही एंबुलेंस अस्पताल तक नहीं पहुंच पाई। ऑक्सीजन की कमी से जूझ रही बुजुर्ग महिला को पुलिस कर्मियों और अन्य लोगों ने स्ट्रेचर में लिटाकर अस्पताल तक पहुंचाया। वहीं, मुख्यमंत्री की अगवानी के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां भी उड़ीं। मुख्यमंत्री रविवार सुबह हेलीकॉप्टर से डिग्री कॉलेज के मैदान में पहुंचे तो पार्टी नेता उनसे मिलने की होड़ में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भूल गए।
कोरोनाकाल में सीएम के दौरे पर भी सवाल
कोरोना काल में मुख्यमंत्री के दौरे पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं। लोगों का कहना था कि यह समय कोरोना से पीड़ित लोगों के इलाज और मदद करने का है। सारा सरकारी अमला, डॉक्टरों की टीम सीएम के पीछे लगी रही। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण ने कहा कि ऐसे समय में सीएम को वर्चुअल बैठक को तबज्जों देनी चाहिए थी। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन देकर आरटी-पीसीआर जांच में गति लाने की मांग सीएम से की। परिषद के प्रदेश सोशल मीडिया सह संयोजक राजेंद्र सिंह दानू ने कहा कि जांच रिपोर्ट में देरी से संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है।
पत्रकार और सीएम का काम एक जैसा
सीएम ने पिथौरागढ़ बेस अस्पताल में निरीक्षण के दौरान पत्रकारों और सीएम के काम को एक समान बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सीएम को कई जगह दौड़ लगानी पड़ती है। उसी तरह पत्रकारों को भी दौड़ना पड़ता है। सीएम और पत्रकारों की ड्यूटी एक सी है। इसलिए भाजपा सरकार ने पत्रकारों को पहले कोरोना टीके लगवाए।