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Uttarakhand: पहले होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के लिए अस्पताल संचालन की चुनौती, मान्यता के लिए ये शर्त जरूरी

Sat, 04 Jul 2026 05:31 PM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी।

सार

उत्तराखंड में अभी तक होम्योपैथिक चिकित्सा में कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है, जिससे युवाओं को बीएचएमएस कोर्स के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। पहले होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के लिए अस्पताल संचालन की चुनौती बनी हुई हैं।
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अस्पताल (प्रतीकात्मक) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राज्य का पहला राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को अगले साल से शुरू करने के लिए अस्पताल संचालन की चुनौती है। मान्यता के लिए कम से कम एक साल तक अस्पताल में ओपीडी व आईपीडी की सेवाएं संचालित होनी अनिवार्य हैं। यदि जल्द ही अस्पताल शुरू नहीं होता है तो 2027 में मान्यता का पेच फंस सकता है।

उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय हर्रावाला के समीप 71 करोड़ की लागत से प्रदेश का पहला होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। अब तक मेडिकल कॉलेज भवन का 30 प्रतिशत काम हो चुका है। निर्माण कार्य कार्यदायी संस्था पेयजल निगम के माध्यम से किया जा रहा है।

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सरकार ने वर्ष 2027 में होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज को शुरू करने का लक्ष्य रखा है लेकिन इसमें चुनौती अस्पताल संचालन की है। हर्रावाला के आसपास होम्योपैथिक चिकित्सालय नहीं है। मेडिकल कॉलेज की मान्यता के लिए अनिवार्य है कि एक साल से अस्पताल में ओपीडी व आईपीडी की सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। ऐसा न होने से मान्यता के लिए 2028 तक इंतजार करना पड़ेगा।

60 सीटों से शुरू होगा मेडिकल कॉलेज

प्रदेश में अभी तक होम्योपैथिक चिकित्सा में कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है, जिससे युवाओं को बीएचएमएस कोर्स के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद युवाओं को दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। नए डॉक्टर मिलने से प्रदेश में होम्योपैथिक चिकित्सा का विस्तार होगा।

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होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज का काम अगले साल पूरा करने का लक्ष्य है। केंद्र सरकार से 30 करोड़ की राशि प्राप्त हो चुकी है। अस्पताल संचालन के लिए आयुर्वेद विश्वविद्यालय से जगह उपलब्ध कराने के लिए बात की गई। अस्पताल के लिए कम से तीन से चार कमरों की जरूरत है। कार्यदायी संस्था को भी छह माह के भीतर निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में अस्पताल भवन को तैयार करने के लिए कहा गया है, जिससे समय पर अस्पताल संचालित किया जा सके। -डॉ. जेएल फिरमाल, निदेशक, होम्योपैथिक विभाग

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