पहाड़ के दूरस्थ इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं का अभाव लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। इन तीन दुश्वारियों का सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं और बुजुर्ग होते हैं। हालात तब और बुरे हो जाते हैं, जब महिला गर्भवती हो, बुजुर्ग गंभीर रूप से बीमार हो, हृदयाघात हो या फिर कोई हादसे का शिकार हुआ हो। सड़क और संचार सुविधा से वंचित परिजनों के पास एक ही चारा होता है कि पीड़ित व्यक्ति को डोली या कुर्सी पर बैठाकर सड़क तक पहुंचाया जाए। पथरीली राहों पर पीड़ित को डोली में लादकर सड़क तक पहुंचाना काफी दुश्वारी भरा होता है और बारिश के मौसम में यह सफर जानलेवा हो जाता है।
तमाम दूरस्थ गांव ऐसे हैं कि जहां से सड़क तक की दूरी ही 30 से 50 किलोमीटर तक है। हाल ही में मुनस्यारी के एक गांव से बुजुर्ग को पैदल अस्पताल पहुंचाने में 42 किलोमीटर की दूरी का सफर तय करने में तीन दिन लग गए थे। ऐसे में इन दूरस्थ क्षेत्रों में एयर एंबुलेंस की जरूरत काफी समय से महसूस की जाती रही है। पिछली बार ही पिथौरागढ़ में हुई आपदा के दौरान प्रभावितों की मदद के लिए कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने हेलीकॉप्टर भेजने की गुहार तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से लगाई थी।
दूरस्थ इलाके के लिए एयर एंबुलेंस की सुविधा होनी चाहिए। इस मामले में मुख्यमंत्री से बात की जाएगी। फिर से केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने का अनुरोध किया जाएगा।
- बलवंत सिंह भौर्याल, भाजपा विधायक कपकोट
एयर एंबुलेंस सेवा सीमांत के लिए बेहद जरूरी थी। मुख्यमंत्री से बात करके सीमांत के लिए राज्य स्तर पर एयर एंबुलेंस संचालन के लिए प्रयास किए जाएंगे।
- चंद्रा पंत, विधायक, पिथौरागढ
केंद्र सरकार ने एयर एंबुलेंस का प्रस्ताव ठुकराकर सीमांत जिले के लोगों की अनदेखी की है। विषम परिस्थितियों में जीवन जीने वाले सीमा क्षेत्र के लोगों के लिए ये गहरा आघात है।
- हरीश धामी, कांग्रेस विधायक धारचूला