शिकायत में कहा गया है कि साल 2017 से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देशभर में चीनी मांझे की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। लेकिन यह खुलेआम बाजार और मोहल्लों में बिक रहा है।
चीनी मांझे से मौत और हादसों का मामला उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग पहुंच गया है। इस मामले में आयोग से हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
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शिकायत में कहा गया है कि साल 2017 से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देशभर में चीनी मांझे की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। लेकिन यह खुलेआम बाजार और मोहल्लों में बिक रहा है। इसकी वजह से लोगों और पक्षियों को जान गंवानी पड़ रही है। कहा, प्रशासन लगातार हादसों के बावजूद मौन है।
यह आम लोगों को संविधान से मिले जीने के मौलिक अधिकार का हनन है। याचिका मेहूंवाला निवासी मोहम्मद आशिक ने दायर की है। उन्होंने बीती दो जनवरी को हरिद्वार में चीनी मांझे की चपेट में आकर हुई मौत का हवाला दिया है।
यह भी बताया है कि चीनी मांझे से लोगों के हाथ कटने व गला कटने की कई घटनाएं अकसर देखने को मिलती हैं। साथ ही इससे काफी संख्या में पशु-पक्षियों की भी मौतें होती हैं। बिजली के तारों में भी चीनी मांझे के कारण फॉल्ट की समस्या बढ़ती जा रही है, परंतु फिर भी यह खुलेआम बेचा जा रहा है।