केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों पर राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों से कहा जा रहा है कि कानूनों में काला क्या है। जिन कानूनों के बनते ही उसमें 18 संशोधन की बात कही जा रही हो, वह कानून कैसा है। इसे काला कानून न कहें तो क्या कहें। इन कानूनों से किसानों को बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है। भंडारण क्षमता की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। एमएसपी की बात कही जा रही है, लेकिन किसान अपने फसलों को कम दामों में बेचने को मजबूर हो रहे हैं। कांट्रेक्ट फार्मिंग से किसानों पर प्रहार किया जा रहा है।
भाजपा की सरकार नहीं मोदी की सरकार
राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में भाजपा की सरकार नहीं है, मोदी की सरकार (कंपनी सरकार) है। भाजपा की सरकार होती थी, लोगों की सुनती, लेकिन कंपनी की सरकार है, इसलिए वह किसी की नहीं सुन रही है। पूरे देश में गुजरात मॉडल लागू किया जा रहा है। लोगों की जमीनें कंपनियों को दी जा रही हैं। यहां कैमरा और कलम पर बंदूक का पहरा है। इसलिए देश को बचाना है तो युवाओं को आगे आना होगा और आंदोलन करना होगा।
भू-कानून आंदोलन का किया समर्थन
भू-कानून लागू करने के लिए आंदोलन को उन्होंने अपना समर्थन दिया। अगर भू-कानून लागू नहीं होता है तो सड़क किनारे की कोई भी जमीन किसानों की नहीं रहेगी। सभी जमीनें बड़ी कंपनियां खरीद लेंगी। किसानों के पास के पास केवल पगडंडियां बचेंगी। जिसको बाद में उसे भी बेचना पड़ेगा। इसलिए आंदोलन करना पड़ेगा। किसान यूनियन आंदोलन का समर्थन करेगा।