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उत्तराखंड: किसानों की मांगों पर ध्यान दे सरकार, वरना आंदोलन झेलने को रहे तैयार - राकेश टिकैत

Wed, 11 Aug 2021 01:00 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

राकेश टिकैत ने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तरह ही उत्तराखंड के किसान भी सरकार की उपेक्षा से परेशान हैं। फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा है।
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भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने उत्तराखंड सरकार पर किसानों की उपेक्षा और अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने उत्तराखंड के किसानों और लोगों के लिए हिमाचल की तर्ज पर विलेज टूरिस्ट पॉलिसी, ट्रांसपोर्ट पॉलिसी, हिल पॉलिसी और बॉर्डर के सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अलग जोन बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर उत्तराखंड सरकार ने किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन झेलने को तैयार रहे।

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राकेश टिकैत ने यह बातें संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में बुधवार को प्रेस क्लब में पत्रकारों से कहीं। राकेश टिकैत ने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तरह ही उत्तराखंड के किसान भी सरकार की उपेक्षा से परेशान हैं। फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा है। अगर उत्तराखंड सरकार उत्तराखंड में हिमाचल की तरह विलेज टूरिज्म की पॉलिसी लागू करे तो यहां के लोगों का पैैसा यहीं के लोगों को मिलेगा और यहां के लोगों और किसानों को दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा।

यहां टूरिज्म की बहुत बड़ी संभावनाएं हैं। इसलिए सरकार तत्काल यहां विलेज टूरिज्म पॉलिसी लागू करे। इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड के किसानों को ट्रांसपोर्ट सब्सिडी देने की मांग की। जब सरकार चीनी पर 11:50 रुपये की सब्सिडी दे सकती है तो फसलों और सब्जियों पर क्यों नहीं। फसलों और सब्जियों को मंडियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। उत्तराखंड की सीमा चीन से मिलती है। सरकार को चाहिए कि वह वह जौनसार-भाबर की तहत बार्डर पर रहने वाले लोगों के लिए अलग जोन बनाए। जिससे कि वहां के लोग वहीं पर रुक सके और पलायन न करें।
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मैदानी क्षेत्र से पहाड़ में नौकरी पर जाने वाले लोगों को हिल अलाउंस मिलता है, तो पहाड़ों पर रहने वालों लोगों को कोई अलाउंस नहीं दिया जाता। इसके लिए तत्काल हिल पॉलिसी बने। टिकैत ने कहा कि उत्तराखंड के किसानों के सामने जंगली जानवरों, एमएसी, गन्ने का भुगतान सहित कई समस्याएं हैं। इस दौरान भाकियू की उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी ऊषा तोमर, संयुक्त किसान मोर्चा गाजीपुर जगतार सिंह बाजवा, भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता गणेश उपाध्याय, भारतीय किसान सभा के गंगाधर नौटियाल सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। 

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जिन कानूनों में बनते ही संशोधन हो वे कानून काले 

केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों पर राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों से कहा जा रहा है कि कानूनों में काला क्या है। जिन कानूनों के बनते ही उसमें 18 संशोधन की बात कही जा रही हो, वह कानून कैसा है। इसे काला कानून न कहें तो क्या कहें। इन कानूनों से किसानों को बर्बाद करने की साजिश रची जा रही है। भंडारण क्षमता की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। एमएसपी की बात कही जा रही है, लेकिन किसान अपने फसलों को कम दामों में बेचने को मजबूर हो रहे हैं। कांट्रेक्ट फार्मिंग से किसानों पर प्रहार किया जा रहा है। 

भाजपा की सरकार नहीं मोदी की सरकार 
राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में भाजपा की सरकार नहीं है, मोदी की सरकार (कंपनी सरकार) है। भाजपा की सरकार होती थी, लोगों की सुनती, लेकिन कंपनी की सरकार है, इसलिए वह किसी की नहीं सुन रही है। पूरे देश में गुजरात मॉडल लागू किया जा रहा है। लोगों की जमीनें कंपनियों को दी जा रही हैं। यहां कैमरा और कलम पर बंदूक का पहरा है। इसलिए देश को बचाना है तो युवाओं को आगे आना होगा और आंदोलन करना होगा।

भू-कानून आंदोलन का किया समर्थन 
भू-कानून लागू करने के लिए आंदोलन को उन्होंने अपना समर्थन दिया। अगर भू-कानून लागू नहीं होता है तो सड़क किनारे की कोई भी जमीन किसानों की नहीं रहेगी। सभी जमीनें बड़ी कंपनियां खरीद लेंगी। किसानों के पास के पास केवल पगडंडियां बचेंगी। जिसको बाद में उसे भी बेचना पड़ेगा। इसलिए आंदोलन करना पड़ेगा। किसान यूनियन आंदोलन का समर्थन करेगा।
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