प्रदेश में स्थापित उद्योगों को बेहतर लाजिस्टिक सुविधा देने के लिए पहली बार नीति बनाई जाएगी। इसके लिए उद्योग विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। इस नीति के बनने से उद्योगों को तैयार माल बाहर भेजने और कच्चा माल मंगवाने में आसानी होगी। साथ ही माल परिवहन लागत भी कम होगी और समय पर माल गंतव्य स्थान तक पहुंच सकेगा।
प्रदेेश में लाजिस्टिक सुविधाओं के अभाव में उद्योगों को माल निर्यात करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कनेक्टिविटी की सुविधा न होने से उद्योगों को तैयार सामान बंदरगाह तक पहुंचाना पड़ता है। जिसे समय पर माल गंतव्य स्थान तक पहुंचने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। अब सरकार उद्योगों के लिए लाजिस्टिक नीति बनाने जा रही है।
इसके लिए मुख्य सचिव और सचिव उद्योग की अध्यक्षता में समितियां बनाई गई है। जिसमें माल परिवहन करने में आने वाली दिक्कतों, सड़क अवरुद्ध होने, सीमाओं पर पुलिस की चेकिंग संबंधित समस्याओं का समाधान करने के लिए नीति में व्यवस्था की जाएगी। भंडार के लिए वेयर हाउस, इनलैंड कंटेनर डिपो, हाईवे पर पार्किंग, ड्राइवरों को ट्रेनिंग समेत अन्य प्रावधान भी किए जाएंगे।
शासन स्तर पर गठित की गई लाजिस्टिक समन्वय समिति
प्रदेश में उद्योगों को लाजिस्टिक की बेहतर सुविधा देने के लिए केंद्र सरकार के दिशानिर्देश पर शासन स्तर पर मुख्य सचिव और सचिव स्तर पर लॉजिस्टिक समन्वय समिति का गठन किया गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति में सचिव उद्योग, सचिव नियोजन, वित्त, परिवहन, नागरिक उड्डयन, राजस्व, वन एवं पर्यावरण, लोक निर्माण, निदेशक उद्योग, प्रबंध निदेशक सिडकुल, नेशनल हाईवे प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी व निदेशक भारतीय विमान पतन प्राधिकरण को सदस्य बनाया गया। वहीं, सचिव उद्योग की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है।
प्रदेश से होता है कि 16284 करोड़ का निर्यात
प्रदेश में स्थापित उद्योग ऑटोमोबाइल, फार्मा, प्लास्टिक, रबड़, रसायनिक उत्पाद, खनिज, लकड़ी, वस्त्र समेत खाद्य उत्पादों का सालाना करोड़ों का निर्यात करते हैं। वर्ष 2018-19 में प्रदेश से 16284 करोड़ का निर्यात किया गया। कोरोना महामारी के कारण उद्योगों का उत्पादन कम होने से निर्यात भी प्रभावित हुआ है।
64 हजार से अधिक एमएसएमई इकाई स्थापित
प्रदेश में 64 हजार से अधिक सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग हैं। जिनमें 13478 करोड़ का पूंजी निवेश हुआ है। जबकि 327 बड़े उद्योगों में 37894 करोड़ का निवेश हुआ है।
प्रदेश की लॉजिस्टिक नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस नीति के बनने से उद्योगों का माल परिवहन लागत कम होगा। साथ ही समय पर सामान गंतव्य स्थान तक पहुंचेगा। अभी तक प्रदेश में लाजिस्टिक नीति नहीं है।
- सुधीर चंद्र नौटियाल, निदेशक उद्योग विभाग