यहां ग्लेशियरों से होतीगाड और धौली गंगा निकलती है जो रैणी में ऋषिगंगा से मिल जाती है। क्षेत्र में बीते 21 अप्रैल से लगातार बर्फबारी हो रही थी, जिससे नीती घाटी के ग्रामीण अपने घरों में ही थे। सुरांईथोटा में बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) का बेस कैंप है।
सुमना में हुए हिमस्खलन की सूचना सबसे पहले यहां के अधिकारी-कर्मचारियों को मिली। यह सूचना धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र में फैल गई, जिसके बाद ग्रामीण जानकारी जुटाने के लिए बाजार में इकट्ठा होने लगे और धौली गंगा के जलस्तर को बार-बार निहारते रहे।
रात होने पर वे एक दूसरे को फोन कर आपदा की जानकारी लेते रहे। कागा गांव के ग्राम प्रधान पुष्कर सिंह राणा और द्रोणागिरी के उदय सिंह रावत का कहना है कि सुमना और ऋषि गंगा क्षेत्र में पहले भी हिमस्खलन की घटनाएं हुई हैं, लेकिन तब विकास कम होने से निचले क्षेत्रों में नुकसान कम होता था।
आज सड़क मार्ग के साथ ही नदियों के किनारे ही आवासीय भवनों का निर्माण हो रहा है, जिससे छोटी-छोटी आपदाएं भी विकराल हो रही हैं।