फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड में पहली बार होगा भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान, लाए गए आठ आस्ट्रेलियन मैरिनो नर भेड़

Thu, 10 Dec 2020 10:20 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal मुनीश रियाल , अमर उजाला, ऋषिकेश
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

राज्य में पहली बार भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान शुरू होने वाला है। उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन अनुसंधान विकास बोर्ड की ओर से इसके लिए पूरी तैयारी की गई है। इसके लिए भेड़ प्रजनन केंद्र कोपड़धार घनसाली से आठ आस्ट्रेलियन मैरिनो भेड़ों को पशुलोक ऋषिकेश लाया गया है।

विज्ञापन


करीब तीन हजार भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान करने का लक्ष्य है। खास बात यह भी है कि देश में फिल्ड में यह प्रयोग पहली बार होने जा रहा है। अभी तक रिसर्च इंस्टीट्यूट और फार्म में भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान किया जाता रहा है। जबकि उत्तराखंड में यह सुविधा फील्ड में पशुपालक के घर पर ही दी जाएगी। 

अभी तक पशुपालन विभाग की ओर से गाय और भैसों का ही कृत्रिम गर्भाधान किया जाता था। अब देश में भेड़ों की नस्ल सुधारने के लिए पहली बार भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन अनुसंधान विकास बोर्ड की ओर से टिहरी गढ़वाल जिले के घोपड़धार (घनसाली) स्थित भेड़ प्रजनन केंद्र में रखी गई 240 आस्ट्रेलियन मैरिनो भेड़ों में से आठ नर भेड़ों को पशुलोक स्थित भेड़ बकरी कृत्रिम गर्भाधान केंद्र में लाया गया है।
विज्ञापन


भेड़ बकरी कृत्रिम गर्भाधान केंद्र के प्रभारी डॉ.अमित अरोड़ा ने बताया कि अभी आठ नर भेड़ों का स्पर्म निकालकर उसकी स्ट्रा तैयारी की जा रही हैं। भेड़ों के कृत्रिम गर्भाधान की ट्रेनिंग के लिए केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर जिला टांक राजस्थान से कुछ डॉक्टर ट्रेनिंग करके आ चुके हैं, कुछ और डॉक्टरों को ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। 


उन्होंने बताया फिलहाल तीन हजार भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भेड़ पालकों की ओर से सहमति दी जा चुकी है। विभाग की ओर से इस कार्यक्रम के तहत भेड़ों का चयन भी किया गया है। इसमें जो भेड़ पालक सर्दियों में चिरबटिया, उत्तरकाशी और अन्य स्थानों से मैदानी क्षेत्रों में उनकी भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा। 

विज्ञापन

अगले सप्ताह से होगा एआई का काम

उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन अनुसंधान विकास बोर्ड की ओर से भेड़ों का चयन करने के बाद उन्हें पोषक तत्वों युक्त आहार दिया जा रहा है। जिससे भेड़ों का पोषण स्तर बढ सके। डॉ.अमित अरोड़ा ने बताया कि एक भेड़ के एक बार के स्पर्म को 15 से 20 मादा भेड़ों में स्थापित किया जा सकता है। अगले सप्ताह से भेड़ों के कृत्रिम गर्भाधान (एआई) का काम किया जाएगा। 

दूसरे चरण में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का होगा प्रयोग

डॉ. अमित अरोड़ा ने बताया की दूसरेे चरण में भेड़ों में कृत्रिम गर्भाधान लेप्रोस्कोपिक सर्जरी पद्धति से किया जाएगा। जिसके लिए डॉक्टर ट्रेनिंग ले रहे हैं।   

भेड़ों में ऐसे होगा  कृत्रिम गर्भाधान

- भेड़ों का चयन
- भेड़ों में टैगिंग
- पोषक तत्व युक्त पौष्टिक आहार खिलाना
- प्रोजेस्टेरोन स्पंज का लगाया जाना
- प्रोजेस्टेरोन स्पंज लगाने के बाद 12 वें हटाना
- 14 वें दिन कृत्रिम गर्भाधान करना

उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन अनुसंधान विकास बोर्ड की ओर से भेड़ों की नस्ल सुधारने के लिए भेड़ों की भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा। यह देश में फील्ड में पहली बार भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम से जहां भेड़ों की नस्ल सुधरेगी, वहीं ऊन उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होगी। सभी तैयारियां पूरी कर दी गई हैं। अगले सप्ताह से भेड़ों में कृत्रिम गर्भाधान शुरु किया जाएगा। 
-डॉ. अविनाश आनंद, सीईओ उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन अनुसंधान विकास बोर्ड उत्तराखंड

उत्तराखंड में यहां हैं भेड़ प्रजनन केंद्र

- भेड़ प्रजनन फार्म पीपलकोटी चमोली
- भेड़ प्रजनन फार्म केदारकांठा चमोली
- भेड़ प्रजनन फार्म बंगाली घाट चमोली
- भेड़ प्रजनन फार्म थालकुंडी पुरोला उत्तरकाशी
- भेड़ प्रजनन फार्म कोपड़धार घनसाली टिहरी
- भेड़ प्रजनन फार्म कर्मी बागेश्वर
- भेड़ प्रजनन फार्म शमालिती बागेश्वर
- भेड़ प्रजनन फार्म बारापट्टा पिथौरागढ़
- भेड़ प्रजनन फार्म पंगु धारचूला पिथौरागढ़
- भेड़ प्रजनन फार्म खलियान बांगर जखोली रुदप्रयाग
- भेड़ किसान ओरियंटेशन मक्कू ऊखमठ रुद्रप्रयाग
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें