उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन अनुसंधान विकास बोर्ड की ओर से भेड़ों का चयन करने के बाद उन्हें पोषक तत्वों युक्त आहार दिया जा रहा है। जिससे भेड़ों का पोषण स्तर बढ सके। डॉ.अमित अरोड़ा ने बताया कि एक भेड़ के एक बार के स्पर्म को 15 से 20 मादा भेड़ों में स्थापित किया जा सकता है। अगले सप्ताह से भेड़ों के कृत्रिम गर्भाधान (एआई) का काम किया जाएगा।
दूसरे चरण में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का होगा प्रयोग
डॉ. अमित अरोड़ा ने बताया की दूसरेे चरण में भेड़ों में कृत्रिम गर्भाधान लेप्रोस्कोपिक सर्जरी पद्धति से किया जाएगा। जिसके लिए डॉक्टर ट्रेनिंग ले रहे हैं।
भेड़ों में ऐसे होगा कृत्रिम गर्भाधान
- भेड़ों का चयन
- भेड़ों में टैगिंग
- पोषक तत्व युक्त पौष्टिक आहार खिलाना
- प्रोजेस्टेरोन स्पंज का लगाया जाना
- प्रोजेस्टेरोन स्पंज लगाने के बाद 12 वें हटाना
- 14 वें दिन कृत्रिम गर्भाधान करना
उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन अनुसंधान विकास बोर्ड की ओर से भेड़ों की नस्ल सुधारने के लिए भेड़ों की भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा। यह देश में फील्ड में पहली बार भेड़ों का कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम से जहां भेड़ों की नस्ल सुधरेगी, वहीं ऊन उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होगी। सभी तैयारियां पूरी कर दी गई हैं। अगले सप्ताह से भेड़ों में कृत्रिम गर्भाधान शुरु किया जाएगा।
-डॉ. अविनाश आनंद, सीईओ उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन अनुसंधान विकास बोर्ड उत्तराखंड
उत्तराखंड में यहां हैं भेड़ प्रजनन केंद्र
- भेड़ प्रजनन फार्म पीपलकोटी चमोली
- भेड़ प्रजनन फार्म केदारकांठा चमोली
- भेड़ प्रजनन फार्म बंगाली घाट चमोली
- भेड़ प्रजनन फार्म थालकुंडी पुरोला उत्तरकाशी
- भेड़ प्रजनन फार्म कोपड़धार घनसाली टिहरी
- भेड़ प्रजनन फार्म कर्मी बागेश्वर
- भेड़ प्रजनन फार्म शमालिती बागेश्वर
- भेड़ प्रजनन फार्म बारापट्टा पिथौरागढ़
- भेड़ प्रजनन फार्म पंगु धारचूला पिथौरागढ़
- भेड़ प्रजनन फार्म खलियान बांगर जखोली रुदप्रयाग
- भेड़ किसान ओरियंटेशन मक्कू ऊखमठ रुद्रप्रयाग