उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने इसका पुरजोर विरोध जताया है। बता दें कि गढ़वाल विवि ने मई के आखिर में हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में डीएवी, डीबीएस सहित 10 अशासकीय डिग्री कॉलेजों को इसी सत्र से असंबद्ध करने का निर्णय लिया था, जिस पर दून में छात्रों ने भी भारी विरोध जताया था।
केंद्रीय विवि के एक्ट में संशोधन है आधार
2009 में गढ़वाल विवि का केंद्रीय विवि एक्ट पास हुआ था। उस एक्ट में जो प्रावधान किए गए थे, उस हिसाब से कॉलेज खुद असंबद्ध हो सकते हैं, लेकिन उन्हें विवि बिना किसी अनियमितता अपने स्तर से या सरकार असंबद्ध नहीं कर सकती। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार केंद्रीय विवि के एक्ट में कोई संशोधन करेगी, तभी सरकार कॉलेजों को असंबद्ध कर सकती है।