युद्ध के बाद दोनों दलों के योद्धा आपस में गले मिले और दोनों ने मिलकर भगवान आदिबदरीनाथ को नये अन्न का भोग लगाया। क्षेत्रीय गांवों की महिलाओं ने मंदिर प्रांगण में चांछरी, झुमैला, नृत्यों की प्रस्तुति दी। मेला मैदान में लगे पांडाल पर लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों का दिनभर सिलसिला जारी रहा। डांडा मज्याड़ी की महिलाओं ने सोंरु भोंरू भड बीरों के नाटक की आकर्षक प्रस्तुति दी। बेड़ी मल्ली की महिलाओं ने द्यूत क्रीड़ा नाटक प्रस्तुत किया।
गैरसैंण नगर पंचायत अध्यक्ष पुष्कर रावत ने इस मेले को बहुत सफल बताते हुए अन्य मेला आयोजकों के लिए एक सीख भी बताया। इस अवसर पर पूर्व मेला अध्यक्ष विजयेश नवानी, पूर्व उपाध्यक्ष विनोद नेगी, प्रधान यशवंत भंडारी, बलवंत भंडारी, बीरेंद्र भंडारी, चंद्रप्रकाश बहुगुणा, नंदा त्रिलोक खत्री, नरेंद्र चाकर, पंकज सती, नरेश बरमोला आदि उपस्थित थे।