प्राधिकरण के प्रतिनिधिमंडल के सामने सीएम ने पर्वतीय जिलों की एक खास समस्या का जिक्र किया। सीएम ने कहा कि पहाड़ में अधिकतर मकान पटाल की छत वाले और मिट्टी-पत्थर के बने होते हैं। आपदा में इन मकानों को नुकसान होता है तो इन्हें कच्चा मकान मानकर बहुत कम मुआवजा आपदा के तहत दिया जाता है। इन घरों को पक्का मान लिया जाए तो लोगों को पर्याप्त मुआवजा मिल पाएगा।
पहाड़ के हिसाब से बनाएं योजनाएं
सीएम ने प्रतिनिधि मंडल से कहा कि आपदा प्रबंधन की अधिकतर योजनाएं मैदान के हिसाब से बनती हैं। ये योजनाएं पहाड़ के हिसाब से बननी चाहिए। पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं का स्वरूप मैदानी क्षेत्रों से अलग है। प्रदेश में जंगल की आग और भूस्खलन से भी काफी नुकसान होता है। इन दोनों को ही प्राकृतिक आपदाओं में शामिल किया जाना चाहिए।
आपदा मित्र के लिए प्रदेश केे मिली सराहना
प्राधिकरण ने आपदा मित्र योजना के तहत प्रदेेश में हुए काम को सराहा। बताया गया कि हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में आपदा मित्र बनाए जा रहे हैं। पर्वतीय जिलों में महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों को भी राहत और बचाव का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सीएम से मिलने वालों में परिषद के संयुक्त सचिव रमेश कुमार, संयुक्त सलाहकार नवल प्रकाश, राज्य आपदा प्राधिकरण के अधिकारी, प्रभारी सचिव आपदा प्रबंधन एसए मुरुगेशन भी शामिल रहे।