प्रदेश में साढ़े सात हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का पिछले पांच साल का लेखाजोखा लेने की शुरुआत भी कर दी गई है। वित्त ने इसके लिए 15 सीए फर्म का चयन कर इन फर्मों को दो माह में ऑडिट करने का आदेश दिया है। पहले चार साल का ऑडिट राज्य की ऑडिट व्यवस्था और अंतिम साल का ऑडिट केंद्र सरकार की ऑनलाइन ऑडिट व्यवस्था के तहत होगा।
प्रदेश में इस समय अधिकतर पंचायतों ने ऑनलाइन काम करना शुरू भी कर दिया है। इनकी ग्राम विकास योजना भी ऑनलाइन ही केंद्र सरकार को सौंपी जा रही है। प्रदेश में तीनों स्तर की पंचायतों को अलग-अलग निधियों से करीब 11 हजार करोड़ रुपये मिलते हैं।
वित्त ने चयनित की गई सीए फर्मों से कहा है कि वे दो माह में यह आडिट पूरा करें। इसके बाद विशेषज्ञ समिति इस आडिट को देखेगी। ग्राम पंचायतों की लेखा परीक्षा संबंधित पंचायतों के ब्लॉक मुख्यालय पर आयोजित की जाएगी।
पांच साल का होगा आडिट...
पंचायतों का आडिट भी वर्ष 2015-16 से लेकर 2019-20 तक के लिए करने का आदेश दिया गया है। सीए फर्मों को कहा गया है कि प्रत्येक पंचायत से कम से कम एक मानव दिवस को आडिट में जरूर शामिल किया जाए। हर सीए फर्म को यह भी कहा गया है कि वे ऑडिट में कम से कम तीन दल शामिल करें।
पर्यवेक्षक अधिकारी भी तैनात
आडिट कार्य के लिए गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के लिए अलग-अलग पर्यवेक्षक भी नियुक्त कर दिए गए हैं। गढ़वाल मंडल के लिए उपनिदेशक विपिन बिहारी लाल और कुमाऊं के लिए उपनिदेशक एसएस नगन्याल को पर्यवेक्षक अधिकारी बनाया गया है। ऑडिट को नियमानुसार कराने की जिम्मेदा भी इनकी होगी।
20 मार्च तक अंतिम रिपोर्ट होगी तैयार
वित्त की ओर से जारी आदेश के तहत विशेषज्ञ समिति की जांच के बाद 20 मार्च तक ऑडिट रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसी के साथ विशेषज्ञ समिति को यह अधिकार भी दिया गया है कि ऑडिट रिपोर्ट में संशोधन के लिए सीए फर्म को आदेश करे। सीए फर्म को तीन दिन में यह संशोधन करके देना होगा।