प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर जरूरतमंद बच्चों के लिए आरक्षित सीटों में से 70 फीसदी खाली रह गईं। केवल 30 फीसदी सीटों पर ही दाखिले हो पाए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इतनी अधिक सीटें खाली रहने की बड़ी वजह यह है कि इन सीटों के लिए विभाग के पास आवेदन ही नहीं आए।
आरटीई के तहत प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी सीटें आरक्षित हैं। पात्र बच्चों को इन सीटों पर एडमिशन के बाद निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था है। इसके बावजूद इस साल बड़ी संख्या में जरूरतमंद बच्चों के लिए आरक्षित सीटें खाली रह गईं हैं।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश के 4511 स्कूलों में कुल 25177 सीटें थीं। इन सीटों पर एडमिशन के लिए विभाग को 13131 आवेदन मिले, लेकिन जांच के बाद 7826 आवेदन ही सही पाए गए। इनमें से 7623 बच्चों को इस साल एडमिशन दिया गया।
अभिभावकों के आरोप
आरोप है कि पात्र होने के बावजूद कुछ बच्चों को एडमिशन नहीं मिल पाया है। अभिभावकों का कहना है कि लॉटरी में उनके बच्चे का नाम आने के बावजूद प्राइवेट स्कूल दाखिला नहीं दे रहे हैं। कुछ स्कूलों की ओर से बताया जा रहा है कि स्कूल में सीटें खाली नहीं हैं।
आरटीई की सीटें पूर्व में भर चुकी हैं। जबकि कुछ स्कूल यह बता रहे हैं कि अभी स्कूल बंद है, खुलने के बाद ही एडमिशन मिल पाएगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल में स्कूलों के बंद होने की वजह से इस तरह की दिक्कत आई है। अब अगले शिक्षा सत्र में ही पात्र बच्चों को एडमिशन हो सकेंगे।
इन जिलों में इतने आवेदन मिले सही
अल्मोड़ा में 251, बागेश्वर में 182, चमोली में 146, चंपावत में 408, देहरादून में 2089, हरिद्वार में 615, नैैनीताल में 1031, पौड़ी में 303, पिथौरागढ़ में 576, रुद्रप्रयाग में 53, टिहरी में 23, ऊधमसिंह नगर में 1898 और उत्तरकाशी जिले में 251 आवेदन सही मिले हैं।
कोरोना काल के चलते इस साल प्राइवेट और सरकारी स्कूल बंद रहे। यही वजह रही कि जरूरतमंद बच्चों के लिए बड़ी संख्या में आरक्षित सीटें खाली रह गई। अब स्कूल खुलने के बाद ही बच्चों के एडमिशन हो सकेंगे।
- डॉ.मुकुल सती, अपर राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा अभियान