प्राथमिक विद्यालय किणजाणी में रह रहे सुधीर बिष्ट ने बताया कि गांव पहाड़ी की ढलान पर होने के कारण गांव की जमीन में भी भू-धंसाव हो रहा है। ग्रामीण दिन में अपने मवेशियों को चारा देने के लिए गांव में पहुंच रहे हैं। शाम होते ही विद्यालय व रिश्तेदारों के यहां लौट रहे हैं। किणझाणी के ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि 60 परिवारों के सामने गांव छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बच गया था। उन्होंने प्रशासन से प्रभावितों के लिए टिन शेड और राहत सामग्री देने की मांग की है। ग्रामीण चरण सिंह और आशुतोष ने गांव का शीघ्र पुनर्वास करने की मांग की है।
किणझाणी गांव के मकान भूस्खलन व भू-धंसाव की चपेट में हैं। गांव के ऊपरी हिस्से के ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने और गदेरे से हो रहे कटाव को रोकने के लिए मेजर ट्रीटमेंट की आवश्यकता है। गांव का पुनर्वास किया जाना चाहिए।
- मनोज रावत, पूर्व विधायक, केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र
जो परिवार स्कूलों में रह रहे हैं, उन्हें खाद्यान्न किट उपलब्ध कराए गए हैं। गांव के कुछ घरों में दरारें आई हैं। गत वर्ष फरवरी में भू-वैज्ञानिकों ने गांव का भूगर्भीय सर्वेक्षण किया था। अभी इसका अध्ययन किया जा रहा है। यदि भू-धंसाव, भूस्खलन की स्थिति नहीं सुधरी तो गांव का पुनर्वास किया जाएगा।
- श्याम सिंह राणा, एडीएम, रुद्रप्रयाग