पूर्व जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने भी नदी किनारे एसटीपी निर्माण न करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उनके निर्देशों को भी अनदेखा कर दिया गया। नगर के सबसे अधिक आबादी वाले मेन मार्किट, तहसील, मंदिर मोहल्ला व संगम मार्केट को महज 150 केएलडी के एसटीपी से जोड़ा गया है। भागीरथी नदी किनारे स्थित एसटीपी की क्षमता कम होने से सीवर का पानी अकसर ओवरफ्लो होकर नदी में गिरता है।
जबकि पिछले महीने एसटीपी की मोटर खराब होने से एसटीपी से पानी बिना फिल्टर हुए नदी में गिरता रहा। बरसात के दौरान नगर की स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जब बीच बाजार से लेकर भागीरथी तक बनी सीवर लाइन के चेंबरों से गंदा पानी सीधे नदी में गिरता है।
अंतरराष्ट्रीय हिंदू हेल्प लाइन प्रदेश संयोजक अशोक टोडरिया , गंगा समति के अध्यक्ष माधव मेवाड़ गुरु, बद्रीश युवा पुरोहित संगठन के प्रवक्ता ऋतिक और विनोद बडोला का कहना है कि जनता भागीरथी नदी के एसटीपी को स्थानांतरित करने की मांग करती आ रही है।
इसके अलावा क्षतिग्रस्त सीवर लाइन की मरम्मत कर पूर्व की भांति नगर का सीवर मुख्य एसटीपी में जा सकता था।, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। संगम स्थल से 100 मीटर पहले बने एसटीपी से नदी में गिरते गंदे पानी को देखकर देश विदेश से आने वाले तीर्थ यात्री भी अच्छा संदेश लेकर नहीं जाते हैं।
ओवरफ्लो की समस्या के समाधान के लिए भागीरथी झूला पुल के समीप मिनी एसटीपी बनाने की योजना है। क्षतिग्रस्त सीवर लाइन की मरम्मत का कोई प्रस्ताव नहीं है।
- वीरेंद्र भट्ट, सहायक अभियंता जल संस्थान देवप्रयाग