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उत्तराखंड: जनजागरूकता के लिए नई पहल, हर माह की 9 तारीख को सुबह 11 बजे बजेगा भूकंप का सायरन

Wed, 07 Oct 2026 08:21 PM IST
Alka Tyagi अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। राज्य का बड़ा भू-भाग भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील जोन चार और पांच में आता है। ऐसे में भूकंप के प्रति जागरूकता, पूर्व तैयारी और समय रहते चेतावनी प्राप्त करना बेहद महत्वपूर्ण है।
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भूकंप - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड में भूकंप के प्रति आमजन को जागरूक करने और राज्य में स्थापित भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के सेंसर व सायरनों की कार्यप्रणाली का नियमित परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए अब हर माह की नौ तारीख को सुबह 11 बजे राज्य में भूकंप का सायरन बजाया जाएगा। यह सायरन किसी वास्तविक भूकंप की सूचना नहीं होगा, बल्कि भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के नियमित परीक्षण और जनजागरूकता के उद्देश्य से बजाया जाएगा।

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मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने देर शाम सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के साथ बैठक कर इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की रणनीति पर चर्चा की।

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील राज्य है। राज्य का बड़ा भू-भाग भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील जोन चार और पांच में आता है। ऐसे में भूकंप के प्रति जागरूकता, पूर्व तैयारी और समय रहते चेतावनी प्राप्त करना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत स्थापित सायरनों और सेंसरों की नियमित जांच जरूरी है, ताकि आपात स्थिति में यह प्रणाली पूरी क्षमता के साथ काम कर सके।
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उन्होंने आवश्यकता के अनुसार राज्य में नए सायरन और सेंसर स्थापित करने के भी निर्देश दिए हैं। नियमित परीक्षण से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि विभिन्न स्थानों पर स्थापित सायरन सही स्थिति में हैं और जरूरत पड़ने पर समय से चेतावनी प्रसारित कर सकते हैं।

हर माह होगी सायरन और प्रणाली की जांच
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बताया कि प्रत्येक माह की 9 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे बजने वाला सायरन प्रणाली के नियमित परीक्षण का हिस्सा होगा। इस दौरान राज्य में स्थापित सायरनों की कार्यप्रणाली की जांच की जाएगी। यदि किसी स्थान पर सायरन के संचालन में तकनीकी समस्या पाई जाती है तो उसे तत्काल ठीक कराया जाएगा। नियमित परीक्षण से तकनीकी खामियों की समय रहते पहचान हो सकेगी और वास्तविक आपदा के दौरान चेतावनी प्रणाली के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

राज्य में 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि वर्तमान में उत्तराखंड में भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के तहत 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए गए हैं। इन सेंसरों के माध्यम से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी की जाती है और निर्धारित प्रणाली के माध्यम से चेतावनी प्रसारित की जाती है। उन्होंने बताया कि यूएसडीएमए और आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली परियोजना के तहत और अधिक सेंसर स्थापित किए जाने का प्रस्ताव गतिमान है। अतिरिक्त सेंसर स्थापित होने से भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी और चेतावनी प्रणाली की क्षमता में और सुधार होगा।

छह अक्तूबर के भूकंप में पूर्व चेतावनी प्रणाली ने किया काम
विनोद कुमार सुमन ने बताया कि 6 अक्टूबर 2026 को रात 10:23 बजे चमोली जिले के थराली के निकट भूकंप आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.9 आंकी गई। भूकंप का केंद्र लगभग 13 किलोमीटर की गहराई में था। उन्होंने बताया कि इस भूकंप के दौरान आईआईटी रुड़की के सहयोग से संचालित भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से भूकंपीय तरंगों के आमजन तक पहुंचने से पहले ही चेतावनी प्राप्त हुई। भूदेव मोबाइल ऐप और स्थापित सायरनों के माध्यम से लोगों को भूकंप की चेतावनी मिली। उन्होंने कहा कि यह घटना भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली की उपयोगिता को रेखांकित करती है। भूकंप जैसी अचानक आने वाली आपदा में कुछ सेकंड की पूर्व चेतावनी भी लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने, गैस और विद्युत उपकरण बंद करने तथा आवश्यक सावधानी बरतने के लिए महत्वपूर्ण समय दे सकती है।

आम लोगों को पता चलेगा, कैसा होता है भूकंप का सायरन
विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य आम लोगों को भूकंप के सायरन से परिचित कराना भी है। सामान्य तौर पर लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि वास्तविक भूकंप की स्थिति में चेतावनी मिलने पर किस प्रकार का सायरन बजेगा। हर माह निर्धारित समय पर सायरन बजने से लोग इसकी ध्वनि से परिचित हो सकेंगे। इससे वास्तविक भूकंप की स्थिति में सायरन सुनाई देने पर लोग उसे पहचान सकेंगे और अनावश्यक भय या भ्रम की स्थिति से बचा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को डराना नहीं, बल्कि जागरूक, सतर्क और तैयार करना है।

सायरन के साथ भूदेव ऐप पर भी मिलेगा परीक्षण संदेश
विनोद कुमार सुमन ने बताया कि प्रत्येक माह की 9 तारीख को पूर्वाह्न 11 बजे भूकंप का सायरन बजाया जाएगा। यह सायरन केवल प्रणाली के परीक्षण और जनजागरूकता के लिए होगा। इसी क्रम में भूदेव मोबाइल ऐप के उपयोगकर्ताओं के मोबाइल फोन पर भी चेतावनी संदेश प्राप्त होगा। मोबाइल में वाइब्रेशन और बीप-बीप की ध्वनि के माध्यम से चेतावनी संकेत दिया जाएगा। उन्होंने आमजन से अपील की कि भूदेव मोबाइल ऐप को मोबाइल फोन में अपडेटेड वर्जन में इंस्टॉल या अपडेट रखें और ऐप को मोबाइल की लोकेशन की अनुमति हमेशा के लिए प्रदान करें, ताकि संबंधित क्षेत्र के लिए जारी भूकंप पूर्व चेतावनी समय पर मोबाइल फोन तक पहुंच सके।
 

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