पिता की प्रेरणा से बन गई आईएएस
तो फिर आप सिविल सेवा में कैसे आ गईं?
मेरे पिता सरकारी सेवा में थे। उनकी इच्छा थी कि मैं प्रशासनिक सेवा में जाऊं। उन्होंने मुझे सिविल सर्विस की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। मैंने तीन बार अखिल भारतीय सेवा की परीक्षा पास कीं। पहली बार मुझे इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विस (आईआईएस) मिली। मैंने दिल्ली में तैनाती भी दी। इसके साथ-साथ मैंने इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) की तैयारी, जिसमें मेरा चयन हो गया। हैदराबाद में प्रशिक्षण के दौरान मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में निकल गईं।
रतूड़ी जी बहुत खुश हैं
मुख्य सचिव बनने के बाद पति की क्या प्रतिक्रिया थी, इस प्रश्न के उत्तर में राधा रतूड़ी ने कहा कि वह बहुत खुश थे। साढ़े तीन साल तक वह प्रदेश में पुलिस महानिदेशक पद पर रहे हैं। मैं शासन में अधिकारी थीं। उनको इस बात की खुशी है कि उनकी पत्नी प्रशासनिक व्यवस्था के सर्वोच्च पद पर हैं।
तीन परीक्षाएं, तीनों में गोल्ड मेडल
राधा रतूड़ी प्रदेश के सबसे योग्य नौकरशाहों में से एक हैं। बॉम्बे विवि से उन्होंने इतिहास में बीए ऑनर्स, ओस्मानिया विवि हैदराबाद से लोक व्यैक्तिक प्रबंधन में एमए, और जनसंचार में डिप्लोमा कोर्स किया और तीनों परीक्षाओं में गोल्ड मेडल से सम्मानित हुईं।
तीन अखिल भारतीय सेवाएं पास कीं
पढ़ाई में विलक्षण रहीं राधा रतूड़ी ने तीन अखिल भारतीय सेवाएं पास कीं। 1986 में उन्होंने भारतीय सूचना सेवा पास की। यह सेवा नहीं सुहाई तो 1987 भारतीय पुलिस सेवा पास की। एक साल ट्रेनिंग के दौरान ही 1988 भारतीय प्रशासनिक सेवा में निकल गईं।
चुनाव प्रक्रिया का लंबा अनुभव
मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को राज्य में चुनाव कराने की प्रक्रिया का लंबा अनुभव है। वह 10 वर्ष प्रदेश में मुख्य चुनाव अधिकारी के पद पर रही हैं।