एसएसबी सीमांत मुख्यालय के डीआईजी एमएम कांडपाल ने कहा कि मित्र राष्ट्र नेपाल के साथ सुरक्षा का मुद्दा कभी नहीं रहा है। गलवां घाटी पर चीन के उपजाए विवाद के बाद नेपाल की तरफ से कुछ उपद्रवी तत्वों ने बॉर्डर पर जरूर एसएसबी के जवानों को उकसाने के प्रयास किए लेकिन जवानों ने संयम और धैर्य से काम लेते हुए मामलों को निपटा दिया। उनके संयम की सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई है।
डीआईजी कांडपाल यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल सीमा पर वर्तमान में हालात ठीक हैं। कभी-कभी नेपाल की तरफ से उपद्रवी तत्व छोटी-छोटी हरकतें करते हैं। चीन की ओर से गलवां घाटी पर उपजे विवाद के बाद सीमा पर हालात से निपटने संबंधी सवाल के जवाब में डीआईजी ने कहा कि नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार के कार्यकाल के दौरान उपद्रवी तत्व आए दिन सीमा पर एसएसबी के जवानों को उकसाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन हमारे जवानों ने संयम और धैर्य से काम लिया और स्थिति को निपटा लिया।
उन्होंने बताया कि चमोली आपदा में भी रानीखेत के राहत दल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और छह शवों को बरामद किया। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करते हुए सीमांत की इकाइयों ने 1.78 लाख पौधों का रोपण भी किया। सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए भी तमाम कार्य किए जा रहे हैं।
जौलजीबी में झूलापुल न खुलने से नेपाल की महिलाओं ने झूलापुल पर नेपाल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। वहां तैनात पुलिस का घेराव कर महिलाओं ने कहा कि भारत ने नेपाल सीमा पर सभी पुल खोल दिए हैं, लेकिन नेपाल सरकार ने अभी जौलजीबी, बलुवाकोट, एलागाड़ तिकड़म और सीतापुल (छांगरु) झूलापुल नहीं खोले हैं। इससे दोनों देशों के सीमांत के लोगों को दिक्कतें हो रही हैं।
सोमवार को नेपाल की महिलाओं ने संघर्ष समिति की अध्यक्ष हीरा चंद के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुल पर पहुंचकर प्रदर्शन किया। उन्होंने नेपाल के जिलाधिकारी को पुल खोलने के लिए ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने कहा कि भारत ने जब पुल खोल दिए हैं। ऐसे में नेपाल सरकार का पुल को बंद करना गलत है। उन्होंने कहा कि पुल बंद होने के कारण स्कूली छात्रों, बीमार बुजुर्गों और पेंशन धारकों के साथ ही लोगों को भी भारी दिक्कतें हो रही हैं।
आपात स्थिति में और अतिआवश्यक कार्य होने पर लोगों को जौलजीबी से दार्चूला जाने में 28 किमी और बलुवाकोट नेपाल के लोगों को 15 किमी का सफर तय कर दार्चूला जाना पड़ रहा है, जिससे नेपाल के लोगों को समय और धन का अतिरिक्त भार उठाना पड़ रहा है। इस मौके पर धाना धामी, सीता चुनारा, गोमती भट्ट, नर्मदा धामी, विमला, शोभा, गीता, लक्ष्मी आदि महिलाएं मौजूद रहीं।