लोकसभा चुनाव के लिए जारी भाजपा के घोषणा पत्र में जम्मू कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों को पर्याप्त स्थान मिला लेकिन उत्तराखंड कहीं छूट गया।
कश्मीर को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने के लिए रेल व सड़क मार्ग देने की घोषणा की लेकिन उत्तराखंड के पहाड़ों पर रेल चढ़ाने की कोशिशों को आगे बढ़ाने तक का इरादा जाहिर नहीं किया।
दैवी आपदा के नाम पर कुछ नहीं
वैसे तो भाजपा ने राष्ट्रीय दृष्टिकोण से आम चुनाव के लिए घोषणा पत्र जारी किया, लेकिन उत्तराखंड को तवज्जों नहीं मिली। उम्मीद तो बहुत थी कि दैवी आपदा के बाद राज्य के पर्वतीय क्षेत्र के पुनर्निर्माण की बात जरूर होगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
विकास देने के मामले में छह संसदीय सीटों वाला जम्मू कश्मीर भाजपा के लिए पांच संसदीय सीटों वाले उत्तराखंड से ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हुआ। जम्मू कश्मीर, आंध्र, तेलंगाना समेत पूर्वोत्तर राज्यों के विकास की चिंता की लेकिन उत्तराखंड पूरी तरह हाशिए पर रहा।
जम्मू कश्मीर की धारा 370 हटाने, जम्मू, कशमीर व लद्दाख संभाग का समान रूप से विकास करने का वादा किया लेकिन उत्तराखंड के पर्वतीय व सीमांत क्षेत्रों के विकास का कोई फार्मूला तैयार नहीं हो सका।
कश्मीर घाटी में विकास का आधारभूत ढांचा खड़ा करने का वादा किया लेकिन उत्तराखंड की आधा दर्जन से ज्यादा घाटियों पर भाजपा नेताओं का ध्यान नहीं गया।
आंध्रा, तेलंगाना के विकास की बात सोची, जम्मू कश्मीर को रेल व सड़कमार्ग से पूर्वोत्तर राज्यों केसाथ जोड़ने का कमिटमेंट भाजपा ने किया लेकिन उत्तराखंड़ में डेढ़ दशक से पहेली बनी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग, बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन को स्थान नहीं मिला।
पहाड़ से पलायन रोकने की मंशा नहीं
हिमालयी प्रौद्योगिकी के लिए एक केंद्रीय विश्वविद्यालय व हिमालयी ग्लेशियरों को बचाने की योजना भी बताई लेकिन पहाड़ से पलायन रोकने की मंशा नहीं झलकी।
दूध, फल सब्जी के लिए रेल के विशेष वैगन चलाने का दावा किया लेकिन पहाड़ की बेमौसमी सब्जी व फल आदि के विपणन की समुचित व्यवस्था की बात घोषणा पत्र समिति केदिमाग में नहीं आई।
प्रदेश के भाजपा नेता दावा करते रहे कि इस बार पार्टी केघोषणापत्र में राज्य पर विशेष फोकस होगा। दैवी आपदा के बाद पुनर्निमाण की बात होगी, लेकिन ये सब बाते कहीं छूट गई।
पार्टी की वरिष्ठ नेत्री उमा भारती ने भी सार्वजनिक तौर पर इस बात की हिमायत की थी कि उत्तराखंड़ इस बार घोषणापत्र का हिस्सा होगा लेकिन इसका कोई उल्लेख नहीं करके पार्टी ने यह मिस्टेक भी कर दी।
भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने भी घोषणा पत्र के लिए जोर शोर से मुद्दे भेजने की बात कही थी लेकिन उत्तराखंड की सुध किसी को नहीं आई।