उत्तराखंड राज्य आंदोलन का एक और साथी रविवार की सुबह बिछड़ गया। लंबी बीमारी के बाद राज्य आंदोलन के प्रखर नेता वेद उनियाल का निधन हो गया। वह 64 वर्ष के थे। राज्य आंदोलन के दौरान उनियाल ने न सिर्फ वैचारिक जागरूकता फैलाने का काम किया था, बल्कि सड़कों पर उतरकर जोरदार संघर्ष किया था।
भावपूर्ण माहौल में हरिद्वार में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पिछले दिनों उनकी सेहत बिगड़ने पर उन्हें दो बार हॉस्पिटल में भर्ती कराना पड़ा था। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य आंदोलनकारी के निधन पर गहरा शोक जताया है।
उनियाल ने रविवार की सुबह अपने दून में तपोवन एनक्लेव स्थित निवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन का समाचार मिलते ही बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उनके आवार पर पहुंच गए। निवास पहुंचने वालों में पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुशीला बलूनी, यूकेडी के संरक्षक बीडी रतूड़ी, डीबीएस कॉलेज के प्राचार्य डा ओपी कुलश्रेष्ठ, आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष रवींद्र जुगरान, आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन नेगी, जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, महासचिव रामलाल खंडूडी, वरिष्ठ आंदोलनकारी नेता विवेकानंद खंडूडी, रायपुर ब्लाक प्रमुख बीना बहुगुणा आदि शामिल थे।
रविवार दोपहर हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर उनियाल का अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके पार्थिव शरीर में यूकेडी का झंडा लपेटा गया था। इस मौके पर यूकेडी के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री दिवाकर भट्ट, पूर्व अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार, शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के प्रतिनिधि के तौर पर हरिद्वार के मेयर मनोज गर्ग भी मौजूद रहे। इधर, जनकवि डा.अतुल शर्मा ने वेद उनियाल के निधन पर गहरा शोक प्रकट किया है। राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने उनियाल की मौत को राज्य के लिए बड़ा नुकसान बताया है।