हिमालयी संस्कृति का प्रतीक हैं छानियां
पर्वतीय क्षेत्रों में छानियों या खरक की जीवनशैली हिमालयी संस्कृति का प्रतीक हैं। यह आमतौर पर पत्थर, लकड़ी और घास से बने साधारण झोपड़े होते हैं, जो चारागाहों के बीच स्थापित किए जाते हैं। ग्रामीण परिवार साल के लगभग छह महीने (अप्रैल से अक्तूबर तक) इन अस्थायी आवासों में पशुओं के साथ व्यतीत करते हैं, जो जंगलों और बुग्यालों में बसे होते हैं। यह प्रथा न केवल जीविका का आधार है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अन्य जगहों पर भी प्रयास होगा
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सोच के तहत ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार की मुहिम में शामिल करते हुए यह प्रयास किया जा रहा है। प्रस्तावित जगह पर सफल संचालन के बाद राज्य के अन्य सभी ट्रैकों के आसपास स्थित सभी छानियों को भी इसी मॉडल के तहत इको हट्स और होमस्टे शैली में बदला जाएगा। इससे कई तरह के रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। यह प्रयोग उत्तराखंड की ईको‑टूरिज्म नीति की महत्वपूर्ण कड़ी है।