आसन्न विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड कांग्रेस अपने नए विजन डाक्यूमेंट के साथ मैदान में उतरेगी। मगर नये और लुभावने वादों को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही कांग्रेस को पिछले घोषणा पत्र का भी हिसाब देना है। बेशक मुख्यमंत्री हरीश रावत घोषणा पत्र पर 70 फीसद अमल हो जाने का दावा कर रहे हैं, मगर सच्चाई यह है कि कांग्रेस घोषणा पत्र के अपने पहले ही वादे को पूरा नहीं कर पाई है।
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य के मतदाताओं से मितव्ययी, भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह शासन की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। लेकिन उसकी ये प्रतिबद्धता फिलहाल घोषणा पत्र तक सिमटती नजर आ रही है। पिछले पांच साल में सरकार न तो लोकायुक्त बना सकी न भ्रष्टाचार के मामलों में कार्यवाही कर सकी। जिन घोटालों की जांच पूरी हो चुकी है, उन पर भी सरकार कुंडली मारकर बैठी है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय तो नब्बे प्रतिशत घोषणाएं पूरी हो जाने का दावा कर रहे हैं। लेकिन लोकायुक्त की तैनाती और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के सवाल पर वह भी ठिठक जाते हैं। इस सवाल पर उनका कहना है कि उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं। सरकार निश्चिततौर पर कार्यवाही करेगी। मजेदार बात यह है कि भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के वादे पर सरकार फंसी हुई है।
हालांकि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने लोकायुक्त की तैनाती को लेकर प्रक्रिया आरंभ की। मगर लोकायुक्त के लिए भेजे गए पैनल में एक नाम ऐसा भेज दिया, जिस पर विवाद गहराने से प्रक्रिया ही लटकी हुई है। चुनाव में भाजपा राज के जिन घोटालों को कांग्रेस ने चुनावी मुद्दा बनाया था, उनकी जांच कभी की पूरी चुकी है, लेकिन अब तक इनका खुलासा नहीं हो पाया है। उलटे मौजूदा सरकार खुद जमीन, शराब और खनन से जुड़े कथित घोटालों को लेकर सवालों में आ गई है।
पहेली बन गए ये घोटाले
मौजूदा कांग्रेस सरकार भी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की तर्ज पर भ्रष्टाचार के मामले में कार्यवाही से बची है। नतीजा यह है कि कथित घोटाले पहेली बन गए हैं। खासतौर पर सिटुर्जिया बायो केमिकल लिमिटेड प्रकरण, लघु जल विद्युत परियोजनाओं का विवादास्पद आवंटन, महाकुंभ 2010 के कार्य, तराई बीज विकास निगम की कार्यप्रणाली, 2010 में आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों में कथित घोटाले व केंद्रीय योजनाओं में अनियमितता की जांच पहले रिटायर्ड आईएएस केआर भाटी को सौंपी गई।
भाटी के इस्तीफे के बाद 28 मार्च 2013 को जांच रिटायर आईएएस विपिन चंद्र त्रिपाठी को सौंप दी गई। त्रिपाठी आयोग ने सभी मामलों की जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। लेकिन आज तक सरकार ने रिपोर्ट का खुलासा नहीं किया है।
19 को बैठक, नवप्रभात ने 14 को बुलाई
घोषणा पत्र समिति की बैठक 19 दिसंबर को होनी है, लेकिन प्राथमिक तैयारियों को लेकर समिति के संयोजक नव प्रभात ने 14 दिसंबर को बैठक बुलाई है। इसकी पुष्टि करते हुये नवप्रभात ने कहा कि बैठक में लोगों से बातचीत करेंगे। पिछले घोषणा पत्र की समीक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये अधिकार समिति का नहीं है। उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने समिति की बैठक को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि 19 को पार्टी प्रभारी अंबिका सोनी घोषणा पत्र समिति की बैठक लेंगी।