इस बार के चुनाव में पांच साल के कार्यकाल की समीक्षा के आधार पर लोगों ने जब भाजपा प्रत्याशी निशंक का आंकलन शुरू किया तो कई स्थानीय मुद्दे सिर उठाकर खड़े हो गए। अधूरा पड़ा हाईवे, बेरोजगारी, टूटी सड़कें, गंगा प्रदूषण, किसानों की समस्याएं आदि को लेकर यह माना जा रहा था कि ये सारे मुद्दे कहीं न कहीं भाजपा प्रत्याशी के लिए नकारात्मक माहौल बनाएंगे। ऐसे में कांग्रेस और बसपा से ज्यादा कड़ी टक्कर मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन 2019 का चुनाव निशंक के लिए 2014 से भी ज्यादा बेहतर साबित हुआ।
इस बार उनकी जीत का अंतर कम होने के बजाय और ज्यादा बढ़ गया। बहरहाल जो परिणाम सामने आए हैं उनसे यह स्पष्ट है कि इस बार के चुनाव में भी कोई स्थानीय मुद्दा चुनाव को प्रभावित नहीं कर पाया। हर तरफ मोदी लहर का असर साफ दिखाई दिया।
विपक्षी दल भी मोदी के अंडर करंट को नहीं भांप पाए। सांसद प्रतिनिधि ओम प्रकाश जमदग्नि का दावा है कि पार्टी को हर क्षेत्र और हर वर्ग में व्यापक समर्थन मिला है। उन्होंने मतदाताओं के प्रति आभार जताया और कहा कि विकास के रूप में लोगों के इस प्यार को लौटाया जाएगा।
डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, सांसद (हरिद्वार, उत्तराखंड) एक कवि भी हैं।
पिता- स्व. परमानंद पोखरियाल
मां- स्व. विशंभरी देवी
जन्म- 15 जुलाई 1959
जन्म स्थान- पिनानी, पौड़ी गढ़वाल
पत्नी- कुसुमकांता
शिक्षा- एमए, पीएचडी(ऑनर्स), डी. लिट(ऑनर्स), हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी श्रीनगर।
साल 1991 से साल 2012 तक पांच बार यूपी और उत्तराखंड की विधानसभा पहुंचे।
साल 1991 में पहली बार उत्तर प्रदेश में कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। जिसके बाद लगातार तीन बार विधायक बने।
साल 1997 में उत्तर प्रदेश सरकार में कल्याण सिंह मंत्रिमंडल में पर्वतीय विकास विभाग के मंत्री बने।
साल 1999 में रामप्रकाश गुप्त की सरकार में संस्कृति पूर्त व धर्मस्व मंत्री रहे।
2000 में उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद प्रदेश के पहले वित्त, राजस्व, कर, पेयजल सहित 12 विभागों के मंत्री बने।
वर्ष 2007 में उत्तराखंड सरकार में चिकित्सा स्वास्थ्य, भाषा तथा विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के मंत्री बने।
वर्ष 2012 में डोईवाला (देहरादून) क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए।
वर्ष 2014 में डोईवाला से इस्तीफा देकर हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए।