प्रदेश सरकार अभी तक 5669 लोगों को वापस ला चुकी है। इसके अलावा राज्य के भीतर कई लोग एक जिले से अपने गृह जिले में जाना चाहते थे। ऐसे सात हजार लोगों को भेजा जा चुका है।राज्य में 35 हजार ऐसे लोग हैं जो दूसरे राज्यों से हैं। उन्होंने पंजीकरण करवा लिया है। उनको भी गृह राज्य में भेजने की व्यवस्था की जा रही है।
रेड जोन और कंटेनमेंट एरिया में दिक्कत
मुख्य सचिव ने बताया कि उत्तराखंड के कई लोग महाराष्ट्र और दिल्ली सहित ऐसे राज्यों में हैं जहां कोविड-19 का संक्रमण ज्यादा है। रेड जोन और कंटेनमेंट एरिया में फंसे प्रवासियों को लाने में दिक्कत आएगी। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ेगा। लेकिन इस तरह के लोग भी निराश न हों, सरकार कोई न कोई हल निकालेगी।
अपने घर में हैं तब भी आ सकते हैं
मुख्य सचिव ने साफ किया कि अगर कोई प्रवासी वहां अपना घर बनाकर या किराये के मकान में रह रहा है, तो उसे भी लाया जा सकता है। अगर इस तरह के लोगों ने पंजीकरण करवाया है, तो उनकी वापसी भी करवाई जाएगी।
1.65 लाख प्रवासी करा चुके हैं पंजीकरण
केंद्र सरकार ने प्रवासियों की घरवापसी की हरी झंडी दिखाई तो राज्य सरकार ने भी (
http://dsclservices.in/uttarakhand-migrant-registration.php) वेबसाइट पर पंजीकरण की प्रक्रिया आरंभ कर दी। मंगलवार तक वेबसाइट पर 1.65 लाख प्रवासी घरवापसी के लिए पंजीकरण करा चुके थे।
-131 लाख प्रवासी बाहरी राज्यों से उत्तराखंड लौटना चाहते हैं
-30 हजार प्रवासी बाहरी राज्यों के हैं, जो घरवापसी करना चाहते हैं
-6000 प्रवासियों को राज्य में ला चुकी है सरकार
-4000 प्रवासियों को राज्य से बाहर भेजा जा चुका
-70 फीसदी प्रवासी श्रमिक व कामगार जिन्होंने वापसी की
-01 दर्जन राज्यों ने प्रवासियों को भेजने की सहमति नहीं दी
सबसे ज्यादा दिल्ली से लौटना चाहते हैं प्रवासी
सबसे ज्यादा करीब 40 हजार प्रवासी दिल्ली से लौटना चाहते हैं। इनमें बहुत बड़ी संख्या उन युवाओं की है, जो होटल व्यवसाय में कार्यरत था और लॉकडाउन के बाद बेरोजगार हो गया। इसके बाद 22 हजार से अधिक लोग यूपी, 20 हजार लोग हरियाणा, 17 हजार लोग महाराष्ट्र , करीब 8500 प्रवासी पंजाब से आना चाहते हैं। देश के 36 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों से प्रवासी उत्तराखंडियों ने घरवापसी के लिए पंजीकरण कराया है।
विशेष ट्रेन के लिए भी प्रयास शुरू
मुख्य सचिव के मुताबिक, प्रवासियों को लाने के लिए रेल विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जा रही है। राज्य सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों के नोडल अफसरों के बीच रेल से प्रवासियों को भेजने को लेकर कार्ययोजना तैयार की जा रही है।