एक मई को जो पहली एसओपी सरकार ने जारी की थी उसमें केवल दो ही नोडल अधिकारी थे। अब जिलाधिकारियों को भी नोडल अधिकारी बना दिया गया है। जिलाधिकारी अब फंसे हुए लोगों को सड़क मार्ग से लाने और भेजने के लिए अन्य राज्यों के नोडल अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे। 13 जिलों के डीएम अब इस काम को करेंगे। इससे लोगों की आवाजाही में तेजी आएगी। इसके लिए डीएम परमिट जारी कर सकेंगे। अपने जिले के बाहर फंसे हुए लोगों को वापस लाने के लिए स्वीकृति का अधिकार भी अब जिलाधिकारियों के पास भी है। वापस आने वाले लोगों को अगर राज्य में ही किसी दूसरे जिले में जाना है तो जिलाधिकारी अपने स्तर से मंडलायुक्त से समन्वय बनाएंगे।
कंटेनमेंट जोन से कोई परमिट नहीं
यह भी अब साफ है कि कंटेनमेंट जोन से न कोई आएगा और न ही कोई इस जोन में भेजा जाएगा। कंटेनमेंट जोन अगर बदलता है तो डीएम आने जाने की अनुमति दे सकते हैं।
रिश्तेदारों को भी लाने की अनुमति
नई एसओपी में अब अन्य राज्यों में फंसे रिश्तेदारों को लाने की अनुमति भी दे दी गई है। यह अनुमति भी जिलाधिकारी की ओर से ही दी जाएगी। ऐसे लोगों को वापस लाने पर स्क्रीन किया जाएगा और उन्हें क्वारंटाइन होना होगा।
उन जिलों के लिए जिनकी सीमा पड़ोसी राज्यों से नहीं मिलती है। वहां अलग व्यवस्था की गई है। इन जिलों के डीएम पहले सीमांत जिलों के डीएम और मंडलायुक्त से बात करेंगे। इसके बाद ही सार्वजनिक वाहनों से आने वालों के लिए पास जारी करेंगे।
एमडी परिवहन निगम से बनाएंगे समन्वय
परिवहन निगम की बसों का इस्तेमाल करने से पहले जिलाधिकारियों को एमडी परिवहन निगम से समन्वय बनाना होगा।
ये है स्थिति ...
1.65 लाख प्रवासियों ने किया है वापसी का आवेदन।
6000 लोग अन्य राज्यों से दूसरे चरण में वापस लौटे।
4000 लोगों को अन्य राज्यों में भेजा गया।
7000 लोग प्रदेश में एक जिले से दूसरे जिले में गए।