दिल्ली की राजनीतिक पार्टियां भले ही उत्तराखंड से जुड़े लोगों को टिकट देने में हाथ खींच लेती हों लेकिन कांग्रेस-भाजपा के लिए उत्तराखंड के प्रवासी मतदाता खासी अहमियत रखते हैं।
सभी बड़े नेता चुनावी समर में
दिल्ली के करीब बीस विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां उत्तराखंड से जुड़े लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। चुनाव के अंतिम दौर में उत्तराखंड कांग्रेस-भाजपा के लगभग सभी बड़े नेता चुनावी समर में झोंक दिए गए हैं।
उत्तराखंड से जुड़े मतदाता बड़ी संख्या में पूर्वी और उत्तर पूर्वी दिल्ली के इलाकों में रहते हैं। करावल नगर, पटपड़गंज, लक्ष्मीनगर, बाबरपुर, घोंडा, मुस्तफाबाद, बाबरपुर के साथ संगम विहार, आरके पुरम, पालम, बुराड़ी जैसी सीटें खासी अहम हैं।
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ऐसे में पहाड़ के अपने नेताओं को बीच पाकर उनका मन पसीज जाए ऐसी रणनीति दोनों ओर से बनाई गई है। दिल्ली में रहने वाले उत्तराखंडी मतदाताओं का मिजाज भांप पाना राजनीतिक पार्टियों के लिए टेढ़ी खीर है।
ऐसा नहीं है कि उत्तराखंडी मतदाताओं का वोट एक तरफा पड़ता है। भाजपा ने पिछले चुनाव में दो विधानसभाओं से उत्तरखंडी उम्मीदवार दिए थे लेकिन करावल नगर से मोहन सिंह बिष्ट ही सफल हुए।
सभी बड़े नेता पहुंचे दिल्ली
मंडावली से दूसरे उम्मीदवर मुरारी सिंह पंवार चुनाव हारे। जबकि करीब एक दर्जन से अधिक जगहों पर उत्तराखंडी मतदाता कांग्रेस के साथ रहा।
इस बार कांग्रेस ने किसी उत्तराखंडी को टिकट नहीं दिया लेकिन केंद्रीय मंत्री हरीश रावत, मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समेत उत्तराखंड के मंत्री यशपाल आर्य, सुरेन्द्र सिंह नेगी, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत व दिनेश अग्रवाल आदि दिल्ली में जा डटे हैं।
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आम तौर पर भाजपा उत्तराखंड केमतदाताओं को अपने अधिक करीब मानती है लेकिन रिश्तों का धागा मजबूत रहे इसके लिए तीनों पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूरी, रमेश पोखरियाल निशंक और भगत सिंह कोश्यारी दिल्ली में डेरा डाले हैं।
बची सिंह रावत, प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, अजय भट्ट पूर्वी-और उत्तर पूर्वी दिल्ली केउत्तराखंड पॉकेट्स में सभाएं व जनसम्पर्क कर रहे हैं।
उत्तराखंड प्रदेश भाजपा में मंत्री दीप्ती रावत अपने पति और दिल्ली की पटपटगंज विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार नकुल भारद्वाज के चुनाव की कमान संभाले हैं।
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