बंद कमरे में लकड़ी या कोयले की अंगीठी को जलाए रखना बेहद खतरनाक है। सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी का कहना है कि बंद कमरे में अंगीठी जलने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। अंगीठी की गैस (कार्बन मोनोऑक्साइड) सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचती है। इससे गैस खून में मिल जाती है और हीमोग्लोबिन कम होने से इंसान दम तोड़ देता है। अंगीठी से निकलने वाली गैस फेफड़ों के अलावा आंखों को भी नुकसान पहुंचाती है। आंखों पर सूखेपन से जख्म का खतरा बढ़ जाता है।
अंगीठी जलाएं, तो ये सावधानियां जरूर बरतें
कमरे को पूरी तरह बंद न करें। खिड़की को जरूर थोड़ा खुला रखें। कमरे में अंगीठी जलाते वक्त पानी भरी एक बाल्टी रख लें, ऐसा करने से कमरे में नमी रहेगी। इससे गैस का खतरा कम होगा। अंगीठी के पास किसी भी तरह की पॉलीथिन या प्लास्टिक का सामान न रखें।