सरकार द्वारा वित्तपोषित खाली पड़े आवासों को सस्ते उत्पादक उपयोग के लिए एआरएचसी में कवर किया जाएगा। इनका किराया स्थानीय निगम या निकाय तय करेंगी। किराया एक से तीन हजार के बीच हो सकता है।
इस योजना से निजी और सरकारी क्षेत्र की कंपनियों को जोड़ने के लिए विकल्प खोला गया है। निजी क्षेत्र में ऐसे हाउसिंग कांप्लेक्स बनाने वालों को सरकार विशेष प्रोत्साहन देगी। इसमें 50 फीसदी फ्लोर एरिया रेशियो या फ्लोर स्पेस इंडेक्स तथा आयकर व जीएसटी की छूट शामिल है।
शहरी क्षेत्रों में प्रवासी मजदूरों के रहने की व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ही रेंटल हाउसिंग स्कीम शुरू हुई है। निदेशालय की वेबसाइट पर जारी नोटिफिकेशन से पूरी जानकारी हासिल की जा सकती है।
-अशोक कुमार पांडेय, अपर निदेशक, शहरी विकास निदेशालय