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जेलों में भेड़-बकरियों की तरह ठूंसे हैं कैदी

Tue, 13 Jun 2017 11:21 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में जेलों की हालत बेहद खस्ता है। मैदानी क्षेत्र की जेलों में क्षमता से अधिक बंदियों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंसा गया है। मंगलौर से विधायक काजी निजामुद्दीन के विधानसभा सत्र में पूछे सवालों से उत्तराखंड की जेलों की दुर्दशा का खुलासा हुआ है।
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उत्तराखंड में 11 कारागार हैं। इनमें 3378 बंदियों को रखने की क्षमता है। क्षमता के मुकाबले जेलों में 4421 बंदियों को रखा गया है। इनमें 4260 पुरुष और 161 महिला बंदी शामिल हैं। यह आंकड़ा 30 मई 2017 तक का है। देहरादून जेल की क्षमता 580 बंदियों की है।

यहां 1121 पुरुष और 54 महिला बंदियों को ठूंसा गया है। यही हाल हल्द्वानी और हरिद्वार जेल का है। हल्द्वानी कुमाऊं और हरिद्वार गढ़वाल की सबसे बड़ी जेल हैं। दोनों ही जेलें मुर्गी बाड़ा बनी हैं। हल्द्वानी में 260 की क्षमता की तुलना में 907 बंदी हैं। इनमें 882 पुरुष और 25 महिला बंदी हैं। 
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हरिद्वार जेल की क्षमता 840 है। लेकिन यहां 1075 पुरुष और 50 महिला बंदियों को रखा गया है। नैनीताल जेल में क्षमता मात्र 71 बंदियों के रखने है। लेकिन यहां भी 114 बंदियों को रखा गया है।

सितारगंज केंद्रीय कारागार में 352, संपूर्णानंद जेल सितारगंज में 47, पौड़ी जिले में 161, टिहरी में 79, चमोली में 76, अल्मोड़ा में 133, रुड़की में 252 बंदियों को रखा गया है।

कारागार मंत्री के मुताबिक 161 महिला बंदियों में से 15 महिलाओं के साथ उनके दुधमुंहे बच्चे भी जेल में हैं। विधानसभा सत्र में जेलों की हालत का मुद्दा उठने के बाद अब इनमें सुधार की उम्मीद भी जगी है। जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और आधुनिकीकरण का मुद्दा शासन स्तर पर कई बार उठ चुका है। कई जेलों का प्रस्ताव शासन में सालों से लंबित है।
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