प्रदेश की प्रॉक्यूर्मेेंट पॉलिसी के अंतर्गत पर्यटन, ऊर्जा व अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रदेश में यदि किसी कंपनी ने रोपवे निर्माण करने के लिए सरकार से एमओयू किया है तो उस कंपनी को भी टेंडर प्रक्रिया में आना होगा। इसी तरह प्रदेश में सोलर प्रोजेक्ट, बस स्टैंड व अन्य क्षेत्रों में निवेश के लिए भी निविदा से काम मिलेगा।
मार्च 2019 तक 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतारने का लक्ष्य
सरकार ने मार्च 2019 तक प्रदेश में करीब 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश को धरातल पर उतारने का लक्ष्य रखा है। इस निवेश के लिए उद्यमियों से सहमति मिल चुकी है। जिसके लिए 17 सौ एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। सिंगल विंडो सिस्टम से अब तक 2464.1 करोड़ रुपये के निवेश की अनुमति निवेशकों को दी जा चुकी है। जिन निवेशकों को सभी विभागों से अनुमति प्राप्त हो चुकी है। वे जल्द ही निवेश को शुरू करेंगे।
प्रदेश की प्रॉक्यूर्मेंट पॉलिसी के अनुसार ही कुछ सेक्टरों में एमओयू के बाद ही निविदा प्रक्रिया अपनाई जाएगी। विनिर्माण उद्योगों में निवेशक सीधे निवेश कर सकता है। लेकिन, पर्यटन, ऊर्जा व शहर के आधारभूत ढांचे से संबंधित निवेश में टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य है।
- उत्पल कुमार सिंह, मुख्य सचिव
सेक्टर वार निवेश के प्रस्ताव
सेक्टर निवेश की राशि (करोड़ में)
ऊर्जा 40707.24
पर्यटन 15362.72
अर्बन इंफ्रास्ट्रेक्चर 14286.69
बायोटेक्नोलॉजी 125
कृषि एवं बागवानी 96.5
विनिर्माण उद्योग 17191
आईटी 4628
हेल्थ केयर 16890
आयुष वेलनेस 1751.55