कागजों में दर्ज जमीन का रिकॉर्ड अचानक गायब हो जाए तो उसके मालिक के लिए परेशानी बढ़ना तय है। ऐसे ही मामले में उत्तराखंड सूचना आयोग ने अब लापता खतौनी रिकॉर्ड तलाशने के सख्त निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड सूचना आयोग ने खतौनी का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित भूमि का अभिलेख तलाशकर अपीलकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मामला विकासनगर तहसील से जुड़ा है। एक व्यक्ति ने आरटीआई के माध्यम से एक भूमि से संबंधित फसली वर्ष 1400 से 1410 तक का रिकॉर्ड मांगा था।
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इसके जवाब में सूचना अधिकारी ने बताया कि संबंधित भूमि का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इस जवाब से असंतुष्ट होकर अपीलकर्ता ने सूचना आयोग में अपील की। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने पाया कि भूमि का रिकॉर्ड पहले व्यक्तिगत रूप से दर्ज किया गया था। बाद में रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के दौरान संबंधित व्यक्ति के नाम पर वास्तविक भूमि से अधिक क्षेत्रफल दर्ज कर दिया गया।
आयोग ने कहा कि भूमि के अभिलेखों का रखरखाव राजस्व विभाग की जिम्मेदारी है। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उसे तलाशने का प्रयास किया जाना चाहिए। आयोग ने सूचना अधिकारी को संबंधित रिकॉर्ड खोजकर अपीलकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सुनवाई में रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के दौरान हुई गलत एंट्री का मामला भी सामने आया। आयोग ने निर्देश दिए कि इस गलत प्रविष्टि के लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी जांच की जाए। साथ ही मामले की जानकारी जिलाधिकारी देहरादून के संज्ञान में लाकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया। सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश के साथ आयोग ने अपील का निस्तारण कर दिया।