प्रौद्योगिकी का समावेश एक प्रमुख फोकस क्षेत्र होगा। प्रशिक्षण में निगरानी और टोही के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग शामिल होगा। साथ ही महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। दोनों सेनाओं के विषय विशेषज्ञ उभरती प्रौद्योगिकियों और बहु-क्षेत्रीय युद्ध में हो रहे विकास पर भी अपने विचार साझा करेंगे।
जनसंपर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल चेतन सिंह कबसूड़ी ने बताया कि यह अभ्यास दोनों सेनाओं को रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं को साझा करने का अवसर प्रदान करता है और विभिन्न भू-भागों और परिचालन वातावरणों में समन्वित सैन्य अभियानों को अंजाम देने की उनकी क्षमता को बढ़ाता है।