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उत्तराखंड आवास नीति 2020: गरीबों के आशियाने की गारंटी के लिए बिल्डर की 15 प्रतिशत भूमि होगी बंधक

Thu, 19 Nov 2020 11:42 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • प्रदेश में उत्तराखंड आवास नीति संशोधन नियमावली 2020 पर लगी कैबिनेट की मुहर
  • अभी तक दस प्रतिशत रकम होती थी परफॉर्मेंस गारंटी के तौर पर बंधक
  • वर्ष 2022 तक सरकार ने गरीबों को आवास देने के लिए किए बदलाव
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उत्तराखंड शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड में वर्ष 2022 तक गरीबों को आवास देने के मकसद से सरकार ने उत्तराखंड आवास नीति में कुछ बदलाव किए हैं। बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तराखंड आवास नीति संशोधन नियमावली 2020 पर मुहर लग गई है। इसके तहत अब गरीबों के आशियाने की गारंटी के तौर पर बिल्डर को बेचने योग्य भूमि का 15 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निकाय में बंधक बनाना होगा।

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प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि आवास नीति के तहत अभी तक यह प्रावधान था कि कुल निर्माण लागत में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी इकाईयों की निर्माण लागत की 10 प्रतिशत राशि परफॉर्मेंस गारंटी के रूप में स्थानीय विकास प्राधिकरण को उपलब्ध कराई जाती थी। अब इसमें संशोधन कर दिया गया है।


इसके तहत अब प्रोजेक्ट की पूरी जमीन में से 15 प्रतिशत बेचने लायक जमीन, जो कि ईडब्ल्यूएस आवासों के निर्माण की जमीन से अलग होगी, को स्थानीय विकास प्राधिकरण में बंधक बनाकर रखा जाएगा। इस पर आने वाला पूरा खर्च बिल्डर की ओर से वहन किया जाएगा।
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ऐसी परियोजनाएं, जिनके तहत सरकारी भूमि पर आवास निर्माण हो रहे हों, उनमें बिल्डर की ओर से ईडब्ल्यूएस आवासों की लागत का 10 प्रतिशत पैसा परफॉर्मेंस गारंटी के रूप में स्थानीय विकास प्राधिकरण में रखना होगा।

गरीबों को मिलेगा आवास तो बिल्डर को लौटाई जाएगी बंधक भूमि

अभी तक का नियम यह था कि ईडब्ल्यूएस और एलआईसी इकाईयों के निर्माण के बाद स्थानीय निकाय से कंपलीशन सर्टिफिकेट मिलता था। जिसके बाद परफॉर्मेंस गारंटी की रकम बिना ब्याज लौटा दी जाती थी। नए नियमों के तहत अब बिल्डर को ईडब्ल्यूएस आवासों को लाभार्थियों के पक्ष में कब्जा और रजिस्ट्री के प्रमाण स्थानीय विकास प्राधिकरण को उपलब्ध कराने होंगे। इसके एक माह के भीतर 15 प्रतिशत भूमि बंधनमुक्त कर दी जाएगी। इसी प्रकार, सरकारी भूमि पर बनने वाले आवासों की परफॉर्मेंस गारंटी बिल्डर की ओर से ईडब्ल्यूएस निर्माण पूरे होने और कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद लौटा दी जाएगी।

उडा को बनाया जाएगा नोडल एजेंसी
अब उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण यानी उडा को एएचपी यानी एफॉर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप आधारित सभी आवासीय परियोजनाओं के नियोजन, क्रियान्वयन और अनुश्रवण के लिए राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाया गया है। बिल्डर की ओर से जो भी प्रस्ताव लाया जाएगा, उसके तहत ईडब्ल्यूएस लाभार्थियों की सत्यापित सूची भी संलग्न करनी होगी। पात्र लाभार्थियों की सूची स्थानीय निकाय से हासिल की जा सकती है।
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45 नहीं 35 प्रतिशत एफएआर पर निर्माण की अनिवार्यता

अभी तक के नियमों के मुताबिक, फ्लोर एरिया रेशियो यानी एफएआर के 35 प्रतिशत पर ईडब्ल्यूएस और 10 प्रतिशत पर एलआईजी आवास बनाने होते थे। बाकी एफएआर पर एलएमआईजी, एमआईजी, एचआईजी भवन निर्मित होते थे। अब इस नियम में भी संशोधन कर दिया गया है। अब 35 प्रतिशत पर ईडब्ल्यूएस भवन बनाने होंगे। बाकी पर एफएआर पर एलआईजी, एलएमआईजी, एमआईजी, एचआईजी भवन निर्मित किए जा सकते हैं। ईडब्ल्यूएस लाभार्थी को छह लाख रुपये में आवास मुहैया कराना होगा।

परियोजना निरस्त हुई तो ब्याज सहित लौटानी होगी रकम
अभी तक के नियमों के तहत, अगर राज्य सरकार की भूमि पर चल रही निर्माण योजना निरस्त होती है तो परफॉर्मेंस गारंटी की रकम को जब्त किया जाता था। परियोजना का शेष निर्माण कार्य स्थानीय निकाय के स्तर से किया जाता था। इस नियम में बदलाव हो गया है।

अब परफॉर्मेंस गारंटी जब्त होने के साथ ही बिल्डर को अनुदान मिला होगा और लाभार्थी की ओर से जो रकम किश्त के रूप में दी गई होगी, उसे रेरा के नियमों के तहत बिल्डर से ब्याज सहित वसूल किया जाएगा। इसी प्रकार, अब योजना निरस्त होने पर जो 15 प्रतिशत भूमि बंधक होगी, उसे स्थानीय निकाय की ओर से बेच दिया जाएगा। इस रकम से ईडब्ल्यूएस भवनों का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।
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