अभी तक का नियम यह था कि ईडब्ल्यूएस और एलआईसी इकाईयों के निर्माण के बाद स्थानीय निकाय से कंपलीशन सर्टिफिकेट मिलता था। जिसके बाद परफॉर्मेंस गारंटी की रकम बिना ब्याज लौटा दी जाती थी। नए नियमों के तहत अब बिल्डर को ईडब्ल्यूएस आवासों को लाभार्थियों के पक्ष में कब्जा और रजिस्ट्री के प्रमाण स्थानीय विकास प्राधिकरण को उपलब्ध कराने होंगे। इसके एक माह के भीतर 15 प्रतिशत भूमि बंधनमुक्त कर दी जाएगी। इसी प्रकार, सरकारी भूमि पर बनने वाले आवासों की परफॉर्मेंस गारंटी बिल्डर की ओर से ईडब्ल्यूएस निर्माण पूरे होने और कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद लौटा दी जाएगी।
उडा को बनाया जाएगा नोडल एजेंसी
अब उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण यानी उडा को एएचपी यानी एफॉर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप आधारित सभी आवासीय परियोजनाओं के नियोजन, क्रियान्वयन और अनुश्रवण के लिए राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाया गया है। बिल्डर की ओर से जो भी प्रस्ताव लाया जाएगा, उसके तहत ईडब्ल्यूएस लाभार्थियों की सत्यापित सूची भी संलग्न करनी होगी। पात्र लाभार्थियों की सूची स्थानीय निकाय से हासिल की जा सकती है।
अभी तक के नियमों के मुताबिक, फ्लोर एरिया रेशियो यानी एफएआर के 35 प्रतिशत पर ईडब्ल्यूएस और 10 प्रतिशत पर एलआईजी आवास बनाने होते थे। बाकी एफएआर पर एलएमआईजी, एमआईजी, एचआईजी भवन निर्मित होते थे। अब इस नियम में भी संशोधन कर दिया गया है। अब 35 प्रतिशत पर ईडब्ल्यूएस भवन बनाने होंगे। बाकी पर एफएआर पर एलआईजी, एलएमआईजी, एमआईजी, एचआईजी भवन निर्मित किए जा सकते हैं। ईडब्ल्यूएस लाभार्थी को छह लाख रुपये में आवास मुहैया कराना होगा।
परियोजना निरस्त हुई तो ब्याज सहित लौटानी होगी रकम
अभी तक के नियमों के तहत, अगर राज्य सरकार की भूमि पर चल रही निर्माण योजना निरस्त होती है तो परफॉर्मेंस गारंटी की रकम को जब्त किया जाता था। परियोजना का शेष निर्माण कार्य स्थानीय निकाय के स्तर से किया जाता था। इस नियम में बदलाव हो गया है।
अब परफॉर्मेंस गारंटी जब्त होने के साथ ही बिल्डर को अनुदान मिला होगा और लाभार्थी की ओर से जो रकम किश्त के रूप में दी गई होगी, उसे रेरा के नियमों के तहत बिल्डर से ब्याज सहित वसूल किया जाएगा। इसी प्रकार, अब योजना निरस्त होने पर जो 15 प्रतिशत भूमि बंधक होगी, उसे स्थानीय निकाय की ओर से बेच दिया जाएगा। इस रकम से ईडब्ल्यूएस भवनों का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।