खंडपीठ ने कहा कि जब प्राग फार्म में जगह चयनित हो चुकी थी तो रानीपोखरी में ले जाने की क्या जरूरत थी। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने अभी तक पूर्व में पारित किसी भी आदेश का पालन नहीं किया है। शुक्रवार को हुई इस मामले की सुनवाई में सरकार की ओर से आदेश का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय के प्रार्थनापत्र को भी नाराज कोर्ट ने निरस्त कर दिया।
पूर्व में वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा की पीठ ने दिए थे आदेश
पूर्व में वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा कि खंडपीठ ने सरकार को ऊधमसिह नगर के किच्छामें प्राग फार्म में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय खोलने का आदेश दिया था। पीठ ने यह भी कहा था कि 16 अगस्त 2018 से कक्षाएं प्रारंभ कराई जाएं और राज्य सरकार विश्वविद्यालय बनाने के लिए 25 एकड़ भूमि हस्तांतरित करे। छह माह बीत जाने के बाद भी भूमि हस्तांतरित नहीं हुई। भोपाल भाकुनी ने अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि विश्वविद्यालय बनाने के बजाय चयनित भूमि को बेचने का प्रयास सरकार कर रही है।
पहले भी अवमानना का नोटिस जारी हुआ था
याची भोपाल भाकुनी के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इसी मामले में पूर्व में एकलपीठ ने अवमानना के तहत प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा, प्रमुख सचिव न्याय, जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को पक्षकार बनाते हुए छह मार्च को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के दिए थे।