हाईकोर्ट ने बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास के मामले में सरकार को 12 अप्रैल तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने सोमवार को दिल्ली निवासी निर्मल गोराना, बंधुआ मुक्ति मोर्चा की याचिका पर सुनवाई की।
याची के मुताबिक रुड़की के मोहपुर गांव के 18 बंधुआ मजदूरों को आलमवाला मोंगा पंजाब से मुक्त कराया गया था। 22 जून 2014 को उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार को पत्र लिखा कि इन मजदूरों की देखभाल व खाने की व्यवस्था की जाए।
जिलाधिकारी ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की। याची ने इन मजदूरों के पुनर्वास की व्यवस्था करने और इसके लिए नियम बनाने की मांग की। याची का यह भी कहना था कि प्रदेश में जितने भी बंधुआ मजदूर कार्य कर रहे हैं उनको चिह्नित किया जाए और बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया जाए।