उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आज एलआईयू में उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत 32 लोगों को नियम विरुद्ध तरीके से निरीक्षक पद पर पदोन्नति देने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पदोन्नति याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार एलआईयू में कार्यरत राज जुयाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि पुलिस महानिदेशक द्वारा 2017 से 2020 के बीच सीधी भर्ती से आए उप निरीक्षकों के प्रमोशन करने के संबंध में 29 सितंबर को डीपीसी की और उसी तिथि को 32 लोगों की उपनिरीक्षक से निरीक्षक के पद पर पदोन्नति कर दी।
याचिका में कहा कि यह विभागीय प्रमोशन नियमावली 2003 व 2018 के विरुद्ध है। ये प्रमोशन 50 प्रतिशत सीधी भर्ती से और 50 प्रतिशत प्रमोशन के आधार पर होने थे, लेकिन विभाग ने नियमों को ताक में रखकर सीधी भर्ती से आए 32 लोगों का डीपीसी के जरिये एक ही दिन में प्रमोशन कर अंतिम निर्णय ले लिया।
याचिकाकर्ता ने सरकार के इस आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए कहा है कि यह पदोन्नति याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।