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उत्तराखंड: आवास किराये मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व सीएम डा. निशंक से एक सप्ताह में मांगा जवाब

Tue, 29 Sep 2020 09:46 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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Ramesh pokhariyal nishank - फोटो : social media
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पूर्व मुख्यमंत्रियों की ओर से आवास, बिजली-पानी और अन्य सुविधाओं का भुगतान अभी तक नहीं करने के मामले में दायर अवमानना याचिकाओं पर हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई।

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इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा व भुवन चंद्र खंडूड़ी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से स्थगनादेश मिल चुका है, जबकि निशंक की ओर से ऐसा कोई आदेश कोर्ट में पेश नहीं किया गया। जिसके बाद कोर्ट ने रमेश पोखरियाल निशंक के मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। 

न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार  देहरादून की रुलक संस्था ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि कोर्ट ने 2019 में सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी आवासों का किराया, बिजली-पानी सहित अन्य सुविधाओं का भुगतान छह माह के भीतर करने को कहा था, लेकिन अभी तक उन्होंने भुगतान नहीं किया है। 

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छात्रवृत्ति घोटाला में हाईकोर्ट में अब छह को होगी सुनवाई 

हाईकोर्ट ने प्रदेश के पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक के छात्रवृत्ति घोटाला में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 6 अक्तूबर की तिथि नियत की है। पूर्व में हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने सुभाष नौटियाल की जनहित याचिका में लगाए आरोपों के आधार पर घोटाले की जांच डायरेक्टर विजिलेंस से हटाकर समस्त दस्तावेजों के साथ एसआईटी को देने कहा था।

साथ में सरकार की ओर से नियुक्त स्पेशल काउंसल पुष्पा जोशी और ललित सामंत ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा था कि एसआईटी ने 77 प्रतिशत जांच पूरी कर ली है। शेष 23 प्रतिशत जांच को उन्हें छह माह का समय दिया जाए। लेकिन कोर्ट ने समय न देकर इस बिंदु पर बहस करने को कहा था। इस पर सुनवाई होनी बाकी है।

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान, एसके सिंह व सुभाष नौटियाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2005 से प्रदेश में अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति का घोटाला किया जा रहा है। छात्रवृत्ति का पैसा छात्रों को न देकर स्कूलों को दिया गया या फिर उन लोगों को दिया गया जो उस स्कूल के छात्र ही नहीं थे। याचिकाकर्ता ने इसकी जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी।
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