कॉर्बेट नेशनल पार्क में पेड़ों के कटान के बाद राजीव भरतरी का तबादला जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष पद पर कर दिया गया था। इसे राजीव भरतरी ने कैट में चुनौती दी थी। कैट ने उनके पक्ष में निर्णय देते हुए उन्हें तत्काल बहाल करने के आदेश राज्य सरकार को दिए थे।
वरिष्ठ आईएफएस राजीव भरतरी को केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश के बाद भी प्रमुख वन संरक्षक पद पर बहाल न करने के मामले में दायर याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।
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सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव वन और प्रमुख वन संरक्षक विनोद सिंघल को दस दिन के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा कि भरतरी के पक्ष में कैट के निर्णय के बावजूद वन विभाग के विभागाध्यक्ष पद पर उनकी बहाली क्यों नही की जा रही है। मामले की अगली सुनवाई तीन अप्रैल को होगी।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार कॉर्बेट नेशनल पार्क में पेड़ों के कटान के बाद राजीव भरतरी का तबादला जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष पद पर कर दिया गया था। इसे राजीव भरतरी ने कैट में चुनौती दी थी। कैट ने उनके पक्ष में निर्णय देते हुए उन्हें तत्काल बहाल करने के आदेश राज्य सरकार को दिए थे लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद भी उनकी बहाली नहीं हुई है।
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विनोद सिंघल अभी तक प्रमुख वन संरक्षक पद पर बने हुए हैं। आईएफएस राजीव भरतरी ने याचिका में कहा कि विनोद सिंघल को हटाकर उन्हें नियुक्त किया जाए। याचिका में कहा गया कि कैट के आदेश के बाद विनोद सिंघल किस अधिकार से पद पर बने हैं।