तीन साल कोर्ट भी किया गुमराह
अपनी दलील में अभियोजन ने कहा था कि हरमीत ने इस हत्याकांड को सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया था। यही कारण था कि उसने तीन सालों तक खुद को मानसिक रूप से बीमार बताने की कोशिश भी की। मुकदमे का ट्रायल 2015 में शुरू हो गया था, लेकिन इसी बीच उसने खुद को मानसिक बीमार कहना शुरू कर दिया। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर दो बार दिल्ली एम्स के चिकित्सकों ने उसकी जांच की, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। इसके बाद एम्स ऋषिकेश के डॉक्टरों के पैनल ने जांच की, मगर खास मदद नहीं मिली। अंत में एक बार फिर एम्स ऋषिकेश के डॉक्टरों ने जांच की तो उसे स्वस्थ घोषित किया गया।
कोर्ट ने पशु से की थी तुलना
कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते वक्त हरमीत की तुलना पशु से की थी। कोर्ट ने लिखा था कि उसका यह कृत्य बर्बरता और पशुतापूर्ण आचरण को दर्शाता है। बचाव पक्ष की मांग आजीवन कारावास है, लेकिन यदि ऐसा हुआ तो इसका संदेश समाज में ठीक नहीं जाएगा। हर व्यक्ति को अपने जान माल की सुरक्षा का अधिकार है। उसने चार लोगों का कत्ल कर एक गर्भस्थ शिशु को दुनिया में आने से पहले ही मौत के घाट उतार दिया। यह कृत्य पशुतापूर्ण है। इससे उसकी उम्र, आर्थिक स्थिति, कमाने का जरिया आदि सब बातें कोई मायने नहीं रखती हैं। ऐसे में सजा भी ऐसी होनी चाहिए कि समाज कहे कि इसके लिए यही सजा ठीक है।
कब क्या हुआ
23 अक्तूबर 2014 - हत्याकांड को अंजाम दिया गया।
24 अक्तूबर 2014 - एफआईआर दर्ज और आरोपी हरमीत गिरफ्तार।
17 दिसंबर 2014 - मजिस्ट्रेट कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल।
05 जनवरी 2015 - मुकदमा सत्र न्यायालय ट्रासंफर।
03 फरवरी 2015 - मुकदमे का ट्रायल शुरू।
08 मई 2015 - गवाहों से जिरह शुरू।
28 सितंबर 2021 - सत्र न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा।
04 अक्तूबर 2021 - हरमीत को दोषी करार दिया गया।
05 अक्तूबर 2021 - हरमीत को फांसी की सजा सुनाई गई।