कोर्ट ने कहा था कि मुकदमों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि उत्तर प्रदेश की ओर से कोई जवाब नहीं आया। कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को भी शपथपत्र पेश कर जवाब देने को कहा था।
एक समाचार पत्र में छपी आरोपियों को अभी तक सजा न मिल पाने की खबर का संज्ञान लेकर हाईकोर्ट ने इन री इन द मैटर ऑफ डिमांड ऑफ जस्टिस फॉर प्रो स्टेटहुड प्यूपिल के नाम से जनहित याचिका दर्ज की थी। याचिका में कहा गया कि 1994 में एक अक्तूबर की देर रात अलग राज्य की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे आंदोलनकारियों को तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर रोक लिया गया था।
इससे आंदोलनकारी नाराज हुए तो पुलिस ने आंदोलनकारियों पर फायरिंग की। इस फायरिंग में दर्जन भर पुरुष और महिला आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए। कुछ महिला आंदोलनकारियों के साथ दुष्कर्म की भी बात भी सामने आई थी। अधिकतर आरोपी अदालतों से बरी हो चुके हैं। यहां तक कि इनकी फाइलें भी न्यायालयों से गायब हो चुकीं हैं।