कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि सेना का दल पर्वतारोहण के लिए प्रशिक्षित था जबकि वन कर्मी इसके लिए प्रशिक्षित नहीं थे अत: उन्हें दल में शामिल करने का औचित्य नहीं था। वापसी में जल्द लौटने के लिए स्कीइंग का प्रयोग सही था। अभियान की वीडियोग्राफी भविष्य में सेना के दलों को ट्रेनिंग देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण थी। कोर्ट ने मामले में निचली अदालत में दायर मुकदमे को खारिज कर दिया। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह मुकदमा दर्ज होना ही नहीं चाहिए था और ऐसे मामलों से सेना के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
17 आतंकियों को अकेले ढेर किया था कोठियाल ने
कर्नल अजय कोठियाल का सेना में शानदार प्रदर्शन रहा है। 2002 में ऑपरेशन पराक्रम के दौरान उन्होंने अकेले 17 आतंकवादियों को ढेर किया था। इसके लिए उन्होंने ऐसी तकनीक अपनाई थी जिसे बाद में सेना के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया, इस अभियान के लिए उन्हें कीर्ति चक्र प्रदान किया गया था। उन्हें शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल, सैन्य सेवा, आपरेशन विजय मेडल सहित दर्जन भर प्रशस्ति मेडल मिले हैं। 2012 में एवरेस्ट फतह कर चुके कोठियाल के नाम 8163 मीटर ऊंची नेपाल की मनासलू चोटी को पहली बार फतह करने का भी रिकॉर्ड दर्ज है।
केदारनाथ आपदा के दौरान अपनी ओर से गठित दलों के साथ 6500 फंसे यात्रियों सहित 46 विदेशियों को रेस्क्यू किया था। उनके ही प्रयासों से वैकल्पिक यात्रा मार्ग तैयार हुआ और पहली बार एयर फोर्स का एमआई 26 केदारनाथ में उतर सका। उनके द्वारा प्रशिक्षित 1800 युवाओं में से 1400 का भारतीय सेना में चयन हो चुका है।