बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर रोक लगाने और यात्रियों की संख्या 200 से अधिक न रखने संबंधी हाईकोर्ट के आदेश का लोकजात, नंदा राजजात, धार्मिक यात्राओं और औली में स्कीइंग आदि पर असर नहीं होगा। हाईकोर्ट के सोमवार को जारी अपने आदेश में नंदा राजजात को देखते हुए यह संशोधन किया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने 21 अगस्त को बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर रोक लगाने के साथ पर्यटकों की संख्या सीमित करने का आदेश जारी किया था। कोर्ट के इस आदेश का असर राज्य की धार्मिक यात्रा नंदा राजजात के साथ लोक जातों और औली में स्कीइंग आदि खेलों पर भी पड़ रहा था। अमर उजाला ने भी इस ओर ध्यान आकर्षित कराया था। याची अल वेदनी बागजी बुग्याल संघर्ष समिति ने कोर्ट से आदेश में संशोधन की मांग की थी।
याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्य में हर 12 साल में नंदा राजजात और हर साल लोक जात होती है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों की धार्मिक और पारंपरिक मान्यता भी इन बुग्यालों से जुड़ी है। इस आदेश से उनकी मान्यताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। समिति ने कोर्ट से मांग की थी कि उनकी इन यात्राओं को अनुमति दी जाए। शुक्रवार को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पक्षों की सुनवाई के बाद धार्मिक यात्राओं को आदेश से बाहर कर दिया है। साथ ही औली में शीतकालीन खेलों पर से भी प्रतिबंध हटा दिया है।