मामले के अनुसार इन द मैटर ऑफ रिमूवल ऑफ इललीगल रिलिजियस स्ट्रक्चर ऑन द पब्लिक लैंड के रूप में कोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रदेश में सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारों को नहीं हटाया गया है।
इस प्रकरण में सरकार की ओर से प्रदेश के सार्वजनिक स्थलों पर बने धार्मिक निर्माण के बारे में रिपोर्ट पेश की गई। जिसमें कहा गया था कि शासन की ओर से सभी 13 जिलों में अवैध रूप से बने मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और चर्च की जांच की गई। इसमें टिहरी गढ़वाल में 96, नैनीताल 9, चंपावत 23, चमोली 3, पिथौरागढ़ 6, पौड़ी 15, अल्मोड़ा 5, उत्तरकाशी 2, रुद्रप्रयाग 7, ऊधमसिंह नगर में 412, हरिद्वार में 171 और देहरादून 21 अवैध निर्माण पाए गए हैं।
बताया गया कि बागेश्वर जिले में धार्मिक स्थल के नाम पर कहीं अतिक्रमण नहीं पाया गया। प्रदेश के 13 जिलों में कहीं एक भी चर्च अवैध या सार्वजनिक स्थल पर नहीं पाए गए। कहा कि इनमें से कुछ को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया है।