इस जमीन में आठ हेक्टेयर पर 52 कमरे, एक बड़ा हॉल और गोशाला का निर्माण किया जा चुका है। मुनि चिदानंद के रसूखदारों से संबंध होने के कारण वन विभाग व राजस्व विभाग की ओर से इसकी अनदेखी की जा रही है।
याचिका में यह भी कहा कि इस अतिक्रमण के कारण सरकार को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राजस्व और वन सचिव, डीएफओ हरिद्वार सहित संबंधित विभागों को आदेश दिए हैं कि वे मुनि चिदानंद द्वारा वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण को खाली कराएं। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।