रेलवे स्टेशन की भूमि से कब्जा खाली कराने के लिए डेढ़ दशक पहले वृहद स्तर पर अभियान चलाया गया था। पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया था। दो दिन तक चले अभियान में काफी बड़े इलाकों को खाली कराने में सफलता मिली थी। कब्जा हटाने के दौरान लोगों के घरों के नीचे से रेलवे की पटरी तक निकली थी। बाद में अधिकारियों की ढिलाई के चलते पुन: रेलवे की जमीन पर कब्जा हो गया।
उस समय कब्जा हटाने के दौरान पुलिस व प्रशासन को लोगों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा था। पर संगठित प्रयास और समन्वय के चलते रेलवे भूमि पर कब्जा खाली कराने में सफल हुआ था, उस दौरान राजपुरा क्षेत्र में कुछ कब्जा हटाया गया। कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान कुछ लोग विरोध जताने के लिए पानी की टंकी पर चढ़ गए थे जिन्हें बमुश्किल समझाकर उतारा गया था। बाद में प्रदर्शनकारी विरोध स्वरूप नैनीताल रोड पर उतर आए थे और डीएम कैंप कार्यालय को घेर लिया था।
2016 में लगे सीमांकन के लिए खंभे
वर्ष-2016 में रेलवे ने सीमांकन खंभे लगाए गए थे। यह खंभे चोरगलिया रोड, लाइन नंबर 17, नई बस्ती, इंदिरा नगर इलाके में अतिक्रमण को चिह्नित करते हुए लगाए गए थे। इसके बाद कब्जा खाली कराने की तैयारी की गई, लेकिन मामला कोर्ट में पहुंचने के कारण कवायद आगे नहीं बढ़ सकी।
पिछले साल चस्पा किए गए थे बेदखली के नोटिस
बाद में यह प्रकरणरेलवे राज्य संपदा अधिकारी इज्जतनगर मंडल बरेली में पहुंचा। राज्य संपदा अधिकारी ने बेदखली का आदेश दिया था। इसके तहत नौ जनवरी 2021 को रेलवे की टीम सुरक्षा बल के साथ नोटिस चस्पा करने पहुंची। नोटिस के लिए 35 से अधिक बोर्ड विभिन्न स्थानों पर लगाए गए थे। इस दौरान रेलवे टीम को विरोध का सामना करना पड़ा था, हालांकि बाद में टीम के समझाने के बाद लोग मान गए थे। वहीं यह प्रकरण राज्य अल्पसंख्यक आयोग में भी पहुंचा था।