याचिका में कहा गया कि बच्चों को जबरन ऑनलाइन क्लास पढ़ाई जा रही है जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। छोटे क्लास के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई समझ में भी नहीं आ रही है।
वहीं, उत्तराखंड में कई स्थानों पर इंटरनेट की व्यवस्था नहीं है और कई लोगों के पास मोबाइल फोन और अन्य सुविधाएं भी नहीं हैं, जिससे कई बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई से वंचित हैं। इसलिए ऑनलाइन पढ़ाई के स्थान पर दूरदर्शन के माध्यम से सभी बच्चों की पढ़ाई कराई जाए।
पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा है कि शिक्षा सचिव के 22 जून 2020 के आदेशानुसार स्कूल प्रबंधन जबरन फीस का दबाव नहीं बनाएंगे। केवल ऑनलाइन पढ़ने वाले बच्चों से सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकते है। कोर्ट ने अभिभावकों की शिकायतों के निस्तारण के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश देते हुए याचिका को निस्तारित कर दिया है।