कंपनी ने निम्स विश्वविद्यालय राजस्थान द्वारा दवा का परीक्षण करने का भी दावा है, जबकि नीम्स का कहना है कि उन्होंने ऐसी किसी भी दवा का क्लिनिकल परीक्षण नहीं किया है। याचिका में कहा कि इस दवा का अभी तक क्लिनिकल परीक्षण तक नहीं किया गया।
इसके उपयोग से शरीर में क्या साइड इफेक्ट हो सकते हैं इसका कोई इतिहास नहीं है। इसलिए दवा पर पूर्ण रोक लगाई जाए और आईसीएमआर की गाइड लाइन के आधार पर भ्रामक प्रचार के लिए संस्था पर कानूनी कार्रवाई की जाए। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार सहित अन्य से जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।