हाईकोर्ट ने राज्य में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम आदेश देते हुए कहा है कि प्रति दुकानदार पांच हजार के स्थान पर प्रति पॉलीथिन पांच सौ रुपये जुर्माना देना होगा। खंडपीठ ने इस प्रकरण पर पूर्व में पारित एकलपीठ के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें एकलपीठ ने प्रति प्लास्टिक बैग पर पांच सौ रुपये जुर्माना लगाने का आदेश दिया था।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष बागेश्वर के व्यापारी मदन लाल और निर्मल कुमार साह की याचिका पर सुनवाई हुई। बागेश्वर नगरपालिका ने पॉलीथिन मिलने पर व्यापारियों के पांच-पांच हजार रुपये के चालान कर दिए थे। दुकानदार इसके खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। पूर्व में न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ ने आदेश दिया था कि जुर्माना प्रति पॉलीथिन-प्लास्टिक बैग पांच सौ रुपये भरना होगा।
एकलपीठ के इस आदेश को हाईकोर्ट में स्पेशल अपील के माध्यम से चुनौती दी गई। पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को सही मानते हुए प्रति पॉली बैग/पॉलीथिन पांच सौ रुपये जुर्माना भरने का आदेश दिया है।
पूर्व में भी जारी हो चुके हैं आदेश
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने वर्ष 2012 में नैनीताल के प्रसिद्ध पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल में प्रति पॉलीथिन पांच सौ रुपये चालान काटने का आदेश दिया था। 2015 में अधिवक्ता ललित मिगलानी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूरे राज्य में पॉलीथिन के उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया था। 11 जनवरी 2017 को राज्य सरकार ने शासनादेश जारी कर प्लास्टिक/पॉलीथिन पकड़े जाने पर दुकानदार पर पांच हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया था।