इसे लेकर वे हाईकोर्ट भी पहुंची, लेकिन इसी दौरान उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने देहरादून महानगर की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज होने के साक्ष्य हाईकोर्ट में प्रस्तुत किए। इसके आधार पर उनका नाम बड़कोट में दर्ज नहीं हुआ और वे चुनाव लड़ने से वंचित रह गई।
अब कंसेरू गांव की मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं होने के आधार पर उनकी सदस्यता निरस्त करने के साथ ही अध्यक्ष पद से हटाने का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था, जिस पर हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने बीते माह पंचायतीराज निदेशालय को दो माह के भीतर निस्तारण करने के आदेश दिए थे।
इस पर विरोधी पक्ष ने डबल बैंच में अपील की थी। बुधवार को हाईकोर्ट की डबल बैंच ने मामले में सुनवाई करते हुए जशोदा राणा की जिला पंचायत सदस्यता रद्द करने के आदेश दिए हैं। वहीं जशोदा राणा का कहना है कि चुनाव लड़ना संवैधानिक अधिकार है।
इसी के तहत उन्होंने कंसेरू से नाम हटाकर बड़कोट में जोड़ने के लिए आवेदन किया था। देहरादून की मतदाता सूची में विरोधियों ने साजिश के तहत उनका नाम दर्ज कराया। अब वहां से भी नाम हटाया जा चुका है। भारत की नागरिक और संवैधानिक पद पर होने के बावजूद कहीं भी मतदाता सूची में नाम दर्ज नहीं किए जाने पर सवाल खड़ा होता है।